दिल्ली के द्वारका इलाके में रक्षा मंत्रालय में कार्यरत एक गर्भवती महिला अधिकारी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में उनके आवास पर मिला है। मृतका के परिवार वालों ने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और प्रारंभिक जांच के आधार पर पति समेत ससुराल वालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। मृतका के परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उनकी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। गर्भावस्था के दौरान भी उसे शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। परिवार का दावा है कि मौत से कुछ घंटे पहले ही अधिकारी ने अपनी मां से फोन पर बात की थी और ससुराल वालों के व्यवहार से तंग आकर परेशानी जाहिर की थी। इस घटना ने कुछ महीने पहले चर्चित त्विषा मामले की याद दिला दी है, जहां एक गर्भवती सरकारी अधिकारी ने इसी तरह की प्रताड़ना के चलते आत्महत्या कर ली थी। पुलिस उपायुक्त के अनुसार, मृतका रक्षा मंत्रालय के एक महत्वपूर्ण विभाग में तैनात थीं और घटना के समय घर पर अकेली थीं। पति और ससुराल वालों से पूछताछ जारी है और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स तथा व्हाट्सएप चैट को खंगाला जा रहा है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा और जांच की दिशा तय होगी। इस घटना को लेकर महिला अधिकार संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है और निष्पक्ष तथा त्वरित जांच की मांग की है। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना चिंताजनक है। रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन विभागीय स्तर पर भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए जाने की संभावना है। समाज में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता की भी आवश्यकता है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर महिलाएं भी अपने ही घर की चारदीवारी में सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस की जांच पूरी होने तक परिवार न्याय की आस में है और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहा है।