कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में पैलेट गन से घायल हुए युवा साहिल लोचब के लिए न्याय की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। जुलाई 20 को हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन की चपेट में आए साहिल की एक आंख की 99 प्रतिशत रोशनी चली गई है। इस मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और पीड़ित छात्र के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। राहुल गांधी ने इस दौरान केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एफआईआर केवल अमित शाह की अनुमति के बाद ही दर्ज होती है। नई दिल्ली के डीसीपी ने जानकारी दी कि पैलेट गन पीड़ित साहिल की शिकायत प्राप्त हो गई है और दिल्ली पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है। साहिल लोचब एक छात्र हैं जो जुलाई माह में हुए प्रदर्शन के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पैलेट गन के छर्रों से उनकी एक आंख को स्थायी क्षति पहुंची है और चिकित्सकों के अनुसार उनकी 99 प्रतिशत दृष्टि चली गई है। इस घटना ने एक बार फिर पैलेट गन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए युवाओं के मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस इस दिशा में कदम उठा रही है। हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने धरना स्थल से मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह केवल एक छात्र का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे मानवाधिकार उल्लंघन बता रही है, वहीं भाजपा ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने भी पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन है और इससे स्थायी विकलांगता का खतरा रहता है। साहिल जैसे युवाओं का भविष्य ऐसी घटनाओं से अंधकारमय हो जाता है। अंततः यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस बल के विवेकपूर्ण उपयोग की बड़ी बहस को जन्म देता है। राहुल गांधी का धरना और दिल्ली पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने की पहल एक सकारात्मक कदम है, लेकिन असली न्याय तब होगा जब दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीति बने। साहिल लोचब जैसे हजारों युवाओं की आवाज बनकर यह आंदोलन व्यवस्थागत सुधार की मांग कर रहा है।