📰 Kotputli News
Breaking News: मल्लिकार्जुन खरगे का दर्द: CWC सदस्यों द्वारा 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान की निंदा न करने पर जताई नाराजगी, कांग्रेस ने भाजपा को बताया 'दलित विरोधी'
🕒 2 weeks ago

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्यों द्वारा 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान की निंदा न किए जाने पर गहरी पीड़ा व्यक्त की है। खरगे ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी ने उन्हें आहत किया है। यह मामला उस समय सामने आया जब संसद परिसर में एक विवादित घटनाक्रम के बाद कुछ सदस्यों द्वारा शुद्धिकरण अनुष्ठान किया गया, जिसका कई दलित संगठनों और विपक्षी नेताओं ने कड़ा विरोध किया था। खरगे का कहना है कि ऐसी प्रथाएं सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं और संविधान की मूल भावना के विपरीत हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए उसे 'दलित विरोधी' करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा ने इस मुद्दे पर संसद में प्रस्ताव पारित करने से रोकने के लिए जानबूझकर हंगामा किया और सदन की कार्यवाही बाधित की। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि भाजपा का यह रवैया दलितों और वंचित वर्गों के प्रति उसकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। पार्टी ने मांग की है कि भाजपा इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे और दलित समुदाय से माफी मांगे। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को लेकर लगातार दूसरे दिन भी गतिरोध जारी रहा। विपक्षी दलों ने 'शुद्धिकरण' प्रस्ताव को पारित कराने की मांग को लेकर भारी हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार दलित उत्पीड़न के मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है और संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि विपक्ष बेवजह सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटका रहा है। दिल्ली कांग्रेस ने इस बीच दावा किया है कि राजधानी में 13,031 बूथ-स्तरीय एजेंट सक्रिय हैं जो यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से न हटाया जाए। पार्टी ने इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खरगे के बयान ने दलित राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय समाज में जातिगत भेदभाव अभी भी गहरी जड़ें जमाए हुए हैं और राजनीतिक दलों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में दलित मुद्दों की केंद्रीयता को रेखांकित किया है। खरगे की पीड़ा और कांग्रेस का आक्रामक रुख जहां एक ओर दलित अधिकारों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दिखाता है, वहीं भाजपा की प्रतिक्रिया उसकी राजनीतिक मजबूरियों को उजागर करती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रह सकता है। सभी दलों को चाहिए कि वे संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर संविधान प्रदत्त समानता और न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करने की दिशा में काम करें।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 20 Aug 2026