प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति निधि (पीएम केयर्स) को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में इस फंड को मिलने वाले दान में 592 प्रतिशत का अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है, जिससे कुल दान राशि 480 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इस भारी-भरकम राशि में से मात्र 0.1 प्रतिशत ही वास्तविक खर्च के लिए उपयोग में लाया गया है, जो फंड के उद्देश्य और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कैग द्वारा ऑडिट की गई रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड का कुल कोष बढ़कर 8,452 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें से 6,641 करोड़ रुपये की विशाल राशि सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) के रूप में बैंकों में जमा है। वित्त वर्ष 2023-25 की दो वर्षों की अवधि में फंड को कुल 1,162.92 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन खर्च केवल 16.47 करोड़ रुपये ही किए गए। दो साल की देरी के बाद जारी किए गए ये आंकड़े फंड के संचालन और उपयोग की गति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। इन खुलासों के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने "पीएम केयर्स? हार्डली" (पीएम केयर्स? मुश्किल से) जैसी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया है कि राहत कोष के नाम पर जमा की गई विशाल राशि का उपयोग जनहित में न के बराबर किया गया है। पार्टी का दावा है कि फंड का मात्र 0.01 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक राहत कार्यों में खर्च हुआ है, जो आपदा प्रबंधन और जनकल्याण के घोषित उद्देश्यों के साथ विश्वासघात है। फंड प्रबंधन की बात करें तो कोष का लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा सावधि जमा के रूप में निष्क्रिय पड़ा हुआ है। जानकारों का मानना है कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए बने इस कोष का ऐसा बड़ा हिस्सा बैंकों में जमा रखने के बजाय स्वास्थ्य ढांचे, शिक्षा, ग्रामीण विकास और आपदा राहत जैसी तत्कालिक आवश्यकताओं पर खर्च किया जाना चाहिए था। फंड के संचालन में पारदर्शिता की कमी और आरटीआई के दायरे से बाहर होने के कारण भी लगातार विवाद बना हुआ है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सार्वजनिक कोषों के प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर भारी मात्रा में दान राशि जमा होना जनता के विश्वास को दर्शाता है, वहीं उसका न्यूनतम उपयोग चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए कि फंड के उपयोग की स्पष्ट नीति बनाए, खर्च की गति बढ़ाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करे ताकि पीएम केयर्स फंड अपने वास्तविक उद्देश्य - आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सहायता - को पूरा कर सके।