अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर ओमान को चेतावनी दी है कि यदि वह ईरान के साथ होने वाले किसी भी परमाणु समझौते या होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हितों के मार्ग में बाधा बना तो उस पर भीषण बमबारी की जाएगी। ब्लूमबर्ग, सीएनएन, द हिंदू, एनडीटीवी और इंडिया टुडे जैसी प्रमुख समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने निजी बातचीत में कहा कि "अमेरिका ओमान को तबाह कर देगा यदि वह रास्ते में आया"। यह धमकी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता अटकी हुई है। ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन ट्रंप की इस चेतावनी ने क्षेत्रीय कूटनीति को नए संकट में डाल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने यह बात तब कही जब जारेड कुशनर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर रहे थे और हमास के साथ गाजा शांति योजना पर चर्चा चल रही थी। ट्रंप का बयान होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक महत्ता को रेखांकित करता है, जहां से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ओमान इस जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित है और उसकी भौगोलिक स्थिति उसे किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में निर्णायक बनाती है। ट्रंप की धमकी न केवल ओमान की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मानदंडों के भी विपरीत है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति का विस्तार है, जिसमें वे सहयोगी देशों पर भी दबाव बनाने से नहीं हिचकते। ओमान ने अब तक इस धमकी पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन खाड़ी देशों में इसे लेकर गहरी चिंता है। सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देश पहले से ही ईरान-अमेरिका तनाव से परेशान हैं। यदि अमेरिका ओमान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्गों पर पड़ेगा। ईरान परमाणु समझौता (जेसीपीओए) 2015 में हुआ था, लेकिन ट्रंप प्रशासन 2018 में इससे बाहर निकल गया था। बाइडेन प्रशासन ने वार्ता बहाल करने का प्रयास किया, लेकिन प्रगति धीमी रही। अब ट्रंप की संभावित वापसी की अटकलों के बीच उनकी यह धमकी ईरान को भी कड़ा रुख अपनाने के लिए उकसा सकती है। ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने क्षेत्रीय शांति के लिए संतुलित कूटनीति अपनाई है, लेकिन ट्रंप की धमकी उनके लिए असहज स्थिति पैदा करती है। निष्कर्षतः, ट्रंप की ओमान को दी गई यह चेतावनी पश्चिम एशिया की नाजुक भू-राजनीति में एक और विस्फोटक तत्व जोड़ती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह संयम बरते और वार्ता के माध्यम से विवाद सुलझाए। किसी भी सैन्य कार्रवाई से निर्दोष नागरिकों की जान जाएगी, वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी और क्षेत्र में दीर्घकालिक अस्थिरता फैलेगी। भारत जैसे देश, जिनके खाड़ी देशों से गहरे आर्थिक और सामरिक संबंध हैं, को भी इस घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए और शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।