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Breaking News: उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक को कावेरी प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया, तमिलनाडु को जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर
🕒 3 weeks ago

उच्चतम न्यायालय ने कावेरी जल विवाद में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के निर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए निर्धारित जल राशि छोड़नी होगी, ताकि दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे का समझौता प्रभावी ढंग से लागू हो सके। यह निर्देश तमिलनाडु की उस याचिका पर आया है जिसमें कर्नाटक द्वारा जल छोड़ने में देरी और कमी का आरोप लगाया गया था। न्यायालय ने कहा कि प्राधिकरण के आदेश बाध्यकारी हैं और किसी भी राज्य द्वारा इसकी अवहेलना नहीं की जा सकती। मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही कानून का पालन भी करेगी। राज्य सरकार ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप जल छोड़ने की प्रक्रिया को तेज करेगी। वहीं, तमिलनाडु के वकीलों ने दलील दी कि कर्नाटक द्वारा लगातार जल रोकने से उनके राज्य के किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, खासकर सिंचाई के मौसम में। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्नाटक को तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने पिछले महीने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन निश्चित मात्रा में जल छोड़ने का निर्देश दिया था, लेकिन कर्नाटक ने बारिश की कमी और जलाशयों के घटते स्तर का हवाला देते हुए इसमें कठिनाई जताई थी। उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि प्राधिकरण के निर्देश वैज्ञानिक अध्ययन और दोनों राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले की प्रगति पर नजर रखेगा और अगली सुनवाई 17 अगस्त को तय की गई है, जिसमें दोनों राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी। इस फैसले को दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय का सख्त रुख जल बंटवारे के समझौते को व्यावहारिक रूप देने में मदद करेगा। हालांकि, कर्नाटक के किसान संगठनों ने चिंता जताई है कि इससे उनके खेतों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार और प्राधिकरण को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि जल वितरण न्यायसंगत और टिकाऊ हो, ताकि दोनों राज्यों के किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा हो सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 Aug 2026