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Breaking News: पश्चिम बंगाल के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी ने टीएमसी कार्यालय में की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा - "राजनीति में आना गलती थी"
🕒 3 weeks ago

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी और दुखद घटना सामने आई है, जहां पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले के स्थानीय तृणमूल कांग्रेस कार्यालय में फंदे से लटका हुआ मिला। 72 वर्षीय वरिष्ठ नेता का शव मंगलवार को पार्टी कार्यालय के एक कमरे में पाया गया, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि बनर्जी लंबे समय से टीएमसी के वफादार नेता माने जाते थे। मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें बनर्जी ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए लिखा था - "राजनीति में आना मेरी सबसे बड़ी गलती थी"। इस नोट में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे। उनके इस अंतिम संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि एक वरिष्ठ नेता को ऐसा कदम उठाना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से वे पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर मानसिक तनाव में चल रहे थे। इस घटना के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि आत्महत्या के पीछे किसी "धमकी" या दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि टीएमसी के अंदर चल रही गुटबाजी और आंतरिक दबाव के कारण ही बनर्जी को यह कदम उठाना पड़ा। वहीं, टीएमसी नेतृत्व ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह निजी कारणों से लिया गया फैसला हो सकता है। पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं और कार्यालय में मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। बनर्जी के परिवार वालों ने भी किसी साजिश की आशंका जताते हुए विस्तृत जांच की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बंगाल की राजनीति में चल रहे आंतरिक संघर्ष और दबाव की राजनीति का एक दुखद उदाहरण है। आशीष बनर्जी बीरभूम जिले के कद्दावर नेता थे और कई बार विधायक रहने के साथ-साथ विधानसभा के उपाध्यक्ष पद की गरिमा भी बढ़ा चुके थे। उनकी मृत्यु से न केवल उनके समर्थकों बल्कि पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। इस घटना ने एक बार फिर राजनीति में मानसिक स्वास्थ्य और नेताओं पर पड़ने वाले दबाव के मुद्दे को सामने ला दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जिससे इस दुखद घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 16 Aug 2026