पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी शुक्रवार को पार्टी कार्यालय में मृत पाए गए। 78 वर्षीय बनर्जी बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। उनका शव कोलकाता स्थित टीएमसी मुख्यालय के एक कमरे से बरामद हुआ। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया है। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें बनर्जी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है कि 'राजनीति में आना उनकी सबसे बड़ी गलती थी' और उन्होंने कभी भ्रष्टाचार नहीं किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बनर्जी गुरुवार शाम से ही पार्टी कार्यालय में थे। शुक्रवार सुबह जब कर्मचारी कमरे में गए तो उन्हें अचेत अवस्था में पाया। तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुसाइड नोट में बनर्जी ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन मानसिक तनाव और राजनीतिक दबाव का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि वे निर्दोष हैं और कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे। इस घटना के बाद टीएमसी खेमे में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक ईमानदार और समर्पित नेता थे। वहीं, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बनर्जी पर राजनीतिक दबाव था और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। अधिकारी ने केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सुसाइड नोट की बातें गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। बनर्जी के परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है। आशीष बनर्जी का राजनीतिक सफर चार दशकों से अधिक का रहा। वे बीरभूम जिले के सिउड़ी विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने गए। ममता बनर्जी की सरकार में वे कृषि मंत्री और फिर विधानसभा उपाध्यक्ष रहे। उनकी छवि एक सादगी पसंद और ईमानदार नेता की थी। पार्टी कार्यकर्ता उन्हें 'दादा' कहकर बुलाते थे। उनके निधन से बीरभूम ही नहीं पूरे बंगाल की राजनीति में शून्य पैदा हो गया है। इस घटना ने एक बार फिर राजनीति में मानसिक स्वास्थ्य और दबाव के मुद्दे को उजागर किया है। वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा और आंतरिक कलह कई बार ऐसे दुखद परिणाम सामने लाती है। पुलिस की जांच पूरी होने तक कई पहलू स्पष्ट होंगे। फिलहाल पूरा बंगाल एक कर्मठ नेता को श्रद्धांजलि दे रहा है। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।