अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तैनात नाविकों द्वारा जहाज से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिशों की चौंकाने वाली खबरों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कई नाविकों ने लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव और अवसाद के चलते यह खतरनाक कदम उठाने का प्रयास किया। यह घटना प्राचीन यूनानी कवि होमर द्वारा 'ओडिसी' में वर्णित समुद्री यात्राओं के मनोवैज्ञानिक प्रभावों की याद दिलाती है, जिसे आधुनिक विज्ञान अब प्रमाणित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महीनों तक समुद्र में रहने, परिवार से दूर रहने, सीमित स्थान में कैद रहने और लगातार युद्ध की तैयारी की स्थिति में रहने से नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन पर तकनीकी और मानवीय समस्याओं के चलते उसे राहत देने के लिए दूसरा विमानवाहक पोत भेजा जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने इस पूरे प्रकरण को ईरान के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों से जोड़ा है, जिससे नाविकों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद से इन विमानवाहक पोतों की तैनाती अवधि अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दी गई थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने खुलासा किया कि ईरान के सैन्य कमांडर ने यूएसएस अब्राहम लिंकन का दौरा किया था, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत देता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लंबी समुद्री तैनाती से 'कैबिन फीवर', नींद की कमी, विटामिन डी की कमी और सामाजिक अलगाव जैसे गंभीर मनोवैज्ञानिक विकार उत्पन्न होते हैं। अमेरिकी नौसेना अब इस संकट से निपटने के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता बढ़ाने, तैनाती अवधि कम करने और जहाजों पर बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने पर विचार कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और सैन्य रणनीति में मानवीय पहलू को प्राथमिकता नहीं दी जाती, ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान दोनों एक स्वर में कहते हैं कि मनुष्य अनंत काल तक समुद्र की अनिश्चितता और अलगाव को सहन नहीं कर सकता। यह पूरा प्रकरण सैन्य रणनीतिकारों, नीति निर्माताओं और समाज के लिए एक चेतावनी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मानवीय गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य की बलि नहीं दी जा सकती। यूएसएस अब्राहम लिंकन की घटना केवल अमेरिकी नौसेना की समस्या नहीं, बल्कि विश्व की सभी नौसेनाओं के लिए सबक है कि लंबी तैनातियों के मानवीय मूल्य को समझा जाए और नाविकों को मशीन नहीं, बल्कि इंसान माना जाए।