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Breaking News: जनगणना 2027: केंद्र ने दूसरे चरण के लिए 40 सवाल अधिसूचित किए, जाति और आधार समेत कई नए ब्यौरे मांगे
🕒 3 weeks ago

केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के दूसरे चरण के लिए 40 सवालों वाला घरेलू प्रश्नावली अधिसूचित कर दी है। भारत के महापंजीयक द्वारा अधिसूचित इस घरेलू अनुसूची में पहली बार मोबाइल नंबर, आधार नंबर, बैंक खाते का विवरण, जाति संबंधी जानकारी और कोविड-19 टीकाकरण की स्थिति जैसे नए ब्यौरे मांगे गए हैं। यह अधिसूचना जनगणना की तैयारियों को लेकर एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि इससे नीतिगत योजनाओं को जमीनी स्तर पर अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी। अधिसूचित प्रश्नावली में कुल 40 सवाल शामिल हैं जिनमें परिवार के मुखिया का नाम, सदस्यों की संख्या, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, प्रवास की स्थिति, विकलांगता की स्थिति जैसे पारंपरिक सवालों के अलावा नए डिजिटल और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को जोड़ा गया है। खास बात यह है कि पहली बार जाति आधारित जनगणना के लिए भी कॉलम जोड़ा गया है, जिसके तहत प्रत्येक सदस्य की जाति और उपजाति का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा। साथ ही, आधार संख्या, मोबाइल नंबर और बैंक खाता संख्या जैसे डिजिटल पहचानकर्ताओं को शामिल करने का मकसद सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस अधिसूचना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस पार्टी ने जाति जनगणना के प्रारूप पर गंभीर संदेह जताते हुए केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जाति संबंधी सवालों का प्रारूप अस्पष्ट है और इससे सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर हो सकती है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जाति जनगणना के नाम पर खानापूर्ति कर रही है, जबकि सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के अनुभवों को नजरअंदाज किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की जनगणना डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम साबित होगी। मोबाइल और आधार जैसे डेटा के समावेश से सरकारी सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाने में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, कोविड टीकाकरण का डेटा भविष्य में स्वास्थ्य नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। हालांकि, डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, जिस पर सरकार को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने होंगे। कुल मिलाकर, जनगणना 2027 की यह अधिसूचना देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समझने की दिशा में एक व्यापक प्रयास है। जहां एक ओर यह नीति-निर्माण के लिए सटीक आंकड़े मुहैया कराएगा, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को डेटा की विश्वसनीयता, निजता और सामाजिक न्याय के पैमानों पर पैनी नजर रखनी होगी। आने वाले महीनों में इस प्रश्नावली पर व्यापक चर्चा और संभावित संशोधनों की गुंजाइश बनी रहेगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 15 Aug 2026