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Breaking News: ट्रंप का बड़ा फैसला: नौसेना को विदेश में जहाज बनाने की अनुमति, विानवाहक पोतों पर फिर लौटेगी भाप कैटापल्ट तकनीक
🕒 3 weeks ago

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना के आधुनिकीकरण और जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश जारी किए हैं। पहले आदेश में नौसेना को सहयोगी देशों में युद्धपोत बनाने की अनुमति दी गई है, जबकि दूसरे आदेश में विानवाहक पोतों पर उन्नत विद्युत चुम्बकीय विान प्रक्षेपण प्रणाली (ईएमएएलएस) के स्थान पर पारंपरिक भाप कैटापल्ट तकनीक को फिर से लागू करने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान और नौसेना विशेषज्ञों के बीच तीव्र बहस का विषय बन गया है। रॉयटर्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि भाप कैटापल्ट प्रणाली अधिक विश्वसनीय और सिद्ध तकनीक है, जबकि ईएमएएलएस में बार-बार तकनीकी खराबी आती रही है। राष्ट्रपति ने कई बार सार्वजनिक रूप से ईएमएएलएस की आलोचना करते हुए कहा कि "भाप बहुत शक्तिशाली है, यह काम करता है।" हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि ईएमएएलएस अधिक कुल है, कम रखरखाव की मांग करता है, और भविष्य के हल्के और भारी दोनों प्रकार के विानों को प्रक्षेपित करने में सक्षम है। इस परिवर्तन से नए गेराल्ड आर. फोर्ड श्रेणी के विानवाहक पोतों के डिजाइन में बड़े पैमाने पर संशोधन करना होगा, जिसकी लागत अरबों डॉलर में आंकी गई है। जहाज निर्माण के मोर्चे पर, विदेश में निर्माण की अनुमति देने का उद्देश्य अमेरिकी शिपयार्ड पर बढ़ते बोझ को कम करना और सहयोगी देशों जैसे जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों की उन्नत शिपबिल्डिंग क्षमताओं का लाभ उठाना है। वर्तमान में अमेरिकी नौसेना के पास 290 से अधिक जहाज हैं, लेकिन 355 जहाजों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए निर्माण गति बढ़ाने की सख्त आवश्यकता है। नौसेना सचिव कार्लोस डेल टोरो ने पहले चेतावनी दी थी कि चीन की शिपबिल्डिंग क्षमता अमेरिका से 230 गुना अधिक है, जो एक रणनीतिक चिंता का विषय है। हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, एक सुरक्षा विशेषज्ञ ने ट्रंप के फैसले को "कु नशे में धुत पुराने पायलट की सलाह" बताते हुए खारिज किया है। आलोचकों का कहना है कि भाप कैटापल्ट पर वापस जाना तकनीकी रूप से पिछड़ा कदम है जो रखरखाव लागत बढ़ाएगा, अधिक नाविकों की तैनाती की मांग करेगा, और भविष्य के मानव रहित हवाई वाहनों के संचालन को सीमित करेगा। साथ ही, विदेश में जहाज निर्माण से घरेलू औद्योगिक आधार कमजोर हो सकता है और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं। निष्कर्षतः, ट्रंप के ये आदेश अमेरिकी नौसैनिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं। जहां एक ओर ये फैसले तत्काल जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने और परिचालन विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिए गए हैं, वहीं दीर्कालिक तकनीकी श्रेष्ठता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता पर इनके प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। आने वाले महीनों में पेंटागन द्वारा इन आदेशों के कार्यान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होगी, तब तक यह बहस जारी रहेगी कि क्या अतीत की तकनीक पर लौटना भविष्य की चुनौतियों का सही जवाब है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 14 Aug 2026