अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान को ट्रंप के होटल के कमरे और उनके विमान की सटीक जानकारी थी। खुफिया सूत्रों का दावा है कि ईरानी एजेंसियों ने ट्रंप के विमान को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, जिसके चलते उनकी सुरक्षा टीम को अभूतपूर्व कदम उठाने पड़े। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। विस्तृत जांच से पता चला है कि ईरान को न केवल ट्रंप के ठहरने वाले होटल की मंजिल का पता था, बल्कि उनके विमान के उड़ान मार्ग और समय की भी पूरी जानकारी थी। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल का खतरा इतना गंभीर था कि ट्रंप को एयर फोर्स वन के बजाय एक छद्म विमान से गुप्त रूप से तुर्की से निकलना पड़ा। इस ऑपरेशन को इतनी गोपनीयता से अंजाम दिया गया कि प्रेस कॉर्प्स के सदस्यों को भी अंधेरे में रखा गया, जिससे पत्रकारों में भारी नाराजगी व्याप्त है। तुर्की में हुए इस नाटकीय घटनाक्रम के दौरान ट्रंप के मंत्रिमंडल के कई सदस्य छद्म विमान में ही रुके रहे, जबकि ट्रंप को चुपचाप दूसरे विमान से सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी कवायद का मकसद संभावित हमलावरों को भ्रमित करना था। सीएनएन के सूत्रों ने पुष्टि की है कि कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के खतरे की विशिष्ट खुफिया सूचना के बाद ही यह योजना बनाई गई थी। इस घटना ने अमेरिकी सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि ट्रंप की गुप्त उड़ान ने पारदर्शिता और प्रेस की स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है। वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की इतनी गहरी पैठ चिंताजनक है। द हिंदू की रिपोर्ट में ट्रंप के हवाले से कहा गया है कि उन्हें खतरे के कारण एयर फोर्स वन से फिसलकर निकलना पड़ा, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चुनौतियां स्पष्ट होती हैं। अंत में, इस प्रकरण ने वैश्विक नेताओं की सुरक्षा को लेकर नए मानदंड स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ईरान की इस दुस्साहसिक साजिश और अमेरिका की प्रतिक्रियात्मक रणनीति ने भू-राजनीतिक तनाव को नया आयाम दिया है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि ईरान को इतनी संवेदनशील जानकारी कैसे मिली, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटना के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करने में जुटा है।