दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में गत दिवस आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। रिक्टर पैमाने पर 7.4 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र पश्चिमी कोलंबिया के तटीय क्षेत्र में था, जिसके झटके राजधानी बोगोटा समेत कई प्रमुख शहरों में महसूस किए गए। अब तक प्राप्त आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 132 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। इसे विगत कई वर्षों में कोलंबिया का सबसे विनाशकारी भूकंप बताया जा रहा है। भूकंप के झटके इतने प्रबल थे कि अनेक बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ऊंची इमारतें चंद सेकंड में मलबे में तब्दील हो गईं और धूल का गुबार पूरे क्षेत्र को ढक गया। कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे दूरदराज के गांवों तक पहुंचना कठिन हो गया है। संचार और विद्युत व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। कोलंबिया सरकार ने आपातकाल की घोषणा करते हुए सेना, पुलिस और अग्निशमन दलों को बचाव अभियान में झोंक दिया है। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और त्वरित सहायता के निर्देश दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी सहायता की पेशकश की है। पड़ोसी देशों समेत संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने राहत सामग्री और चिकित्सा दल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने के लिए विशेष उपकरणों और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण से कोलंबिया प्रशांत अग्नि वलय पर स्थित होने के कारण भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इससे पहले वर्ष 1999 में आर्मेनिया शहर में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप में सैकड़ों लोग मारे गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भूकंप के बाद के झटके (आफ्टरशॉक्स) अभी कई दिनों तक जारी रह सकते हैं, जिससे क्षतिग्रस्त ढांचों के गिरने का खतरा बना हुआ है। इस त्रासदी ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानवीय असहायता को उजागर किया है। सरकार और समाजसेवी संगठन पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाने में जुटे हैं। घायलों के समुचित इलाज और बेघर हुए लोगों के पुनर्वास की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है। पूरा देश इस कठिन घड़ी में एकजुटता दिखा रहा है। दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ राहत कार्य निरंतर जारी हैं।