दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में रविवार को आए विनाशकारी भूंकप ने भारी तबाही मचाई है। रिक्टर पैमाने पर 7.4 तीव्रता वाले इस शक्तिशाली भूंकप का केंद्र प्रशांत तट के पास स्थित एल चार्को शहर के निकट था, जिसके झटके राजधानी बोगोटा समेत कई प्रमुख शहरों में महसूस किए गए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, इस भीषण त्रासदी में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। अधिकारियों ने स्थिति को "गंभीर" बताते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के आदेश दिए हैं। भूंकप के झटके इतने तेज थे कि सैकड़ों इमारतें भरभराकर ढह गईं, जिनमें आवासीय भवन, स्कूल और अस्पताल शामिल हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र नारिनो विभाग है, जहां भूस्खलन के कारण कई सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे राहत सामग्री और बचाव दलों के पहुंचने में बाधा आ रही है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने आपातकालीन बैठक बुलाकर सेना, पुलिस और अग्निशमन विभाग को तत्काल राहत कार्य में जुटने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवीय सहायता की अपील की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भूंकप के समय लोग अपने घरों में सो रहे थे, अचानक तेज झटकों ने उन्हें बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। कई लोग मलबे में दब गए, जिन्हें निकालने के लिए स्थानीय नागरिक भी बचाव दलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। अस्पतालों में घायलों की भीड़ लगी हुई है, जहां चिकित्सा कर्मी चौबीसों घंटे इलाज में जुटे हैं। बिजली और संचार सेवाएं ठप होने से राहत कार्यों में और मुश्किलें आ रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोलंबिया "रिंग ऑफ फायर" क्षेत्र में स्थित है, जहां भूकंपीय गतिविधियां आम हैं, लेकिन इस तीव्रता का भूंकप दशकों बाद आया है। मौसम विभाग ने आफ्टरशॉक्स की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी है। सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी शिविर लगाए हैं और भोजन, पानी तथा दवाओं का वितरण शुरू कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भूंकप रोधी निर्माण मानकों का पालन कितना आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी सहायता के लिए हाथ बढ़ाया है। कोलंबिया सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल जान-माल की रक्षा और प्रभावितों को राहत पहुंचाने पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई दूरदराज के इलाकों से संपर्क अभी तक बहाल नहीं हो सका है।