📰 Kotputli News
Breaking News: आईआईटी दिल्ली दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी का संबोधन: सुरक्षा व्यवस्था सख्त, छात्राओं की कम संख्या पर जताई निराशा, युवाओं को 'विकसित भारत' की यात्रा में योगदान का आह्वान
🕒 4 weeks ago

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के 2026 के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन ने संस्थान परिसर को अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया। प्रधानमंत्री के 'आउटरीच' कार्यक्रम के तहत हुए इस आयोजन में सुरक्षा प्रोटोकॉल इतने कड़े थे कि छात्रों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे प्रधानमंत्री के सामने कितना झुककर अभिवादन करें। इस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने जहां परिसर की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित किया, वहीं छात्रों में एक असहजता का भाव भी पैदा कर दिया। टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी हुई थी, जिससे उत्सव का माहौल कुछ हद तक तनावपूर्ण बन गया था। समारोह के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने संबोधन में भारतीय युवाओं की क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का युवा वर्ग आज केवल विश्व के साथ प्रतिस्पर्धा ही नहीं कर रहा, बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहा है। द प्रिंट के अनुसार, जोशी ने नई शिक्षा नीति और तकनीकी क्षेत्र में हो रहे सुधारों को इस परिवर्तन का श्रेय दिया। हालांकि, समारोह का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने पदक विजेताओं में छात्राओं की अत्यंत कम संख्या पर खुलकर निराशा व्यक्त की। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि 'केवल एक या दो' छात्राओं का पदक जीतना निराशाजनक है और इसमें 'और अधिक होना चाहिए था'। इस टिप्पणी ने आईआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों में लैंगिक विविधता और समावेशन के सवाल को एक बार फिर से विमर्श के केंद्र में ला दिया है। इंडियन एक्सप्रेस ने प्रधानमंत्री के संबोधन के प्रमुख अंशों को रेखांकित करते हुए बताया कि मोदी ने अपने भाषण में 'मेरे खून में पहली बार' जैसे व्यक्तिगत प्रसंगों से लेकर 'जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है' जैसी गहरी दार्शनिक बातें कहीं। उन्होंने छात्रों को केवल करियर की दौड़ में न भागने, बल्कि जीवन के व्यापक अर्थ समझने की सीख दी। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, प्रधानमंत्री ने जेन-जेड (Gen Z) को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे ही 'विकसित भारत' की यात्रा को प्रभावित और निर्धारित करेंगे। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी नवाचार क्षमता और उद्यमशीलता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें, न कि केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए। इस दीक्षांत समारोह ने जहां एक ओर भारत की तकनीकी श्रेष्ठता और युवा शक्ति का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर संस्थागत ढांचे में मौजूद लैंगिक असंतुलन और वीआईपी संस्कृति के कारण उत्पन्न होने वाली असहजता को भी उजागर कर दिया। प्रधानमंत्री की निराशा भरी टिप्पणी आईआईटी प्रशासन और नीति निर्माताओं के लिए एक वेक-अप कॉल है कि मेधा की पहचान में लैंगिक भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। साथ ही, सुरक्षा के नाम पर शैक्षणिक संस्थानों के खुले और मुक्त वातावरण का दम न घुटे, इस पर भी गंभीर चिंतन आवश्यक है। अंततः, प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था: युवा शक्ति ही भारत के भविष्य की वास्तविक निर्माता है, बशर्ते उसे समान अवसर और मुक्त सोच का वातावरण मिले।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 08 Aug 2026