झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी परीक्षा को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया जब एक व्यक्ति ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की प्रदेश अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी। आरोपी ने नेहा को 'राष्ट्रविरोधी' बताते हुए यह हमला किया, जिसके तुरंत बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इस घटना ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और गरमा दिया है। छात्र संगठन और विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे हैं, जबकि सत्ताधारी गठबंधन ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है। जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से छात्र रांची के मोरहाबादी मैदान में धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को राज्य सरकार के मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल आंदोलनकारी छात्रों से मिला और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया, लेकिन छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक परीक्षा रद्द कर नई परीक्षा की घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने जेपीएससी के तीन सेवारत सदस्यों को पूछताछ के लिए तलब किया है। माना जा रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच अब तेज होगी। स्याही फेंकने की घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। भाजपा ने इस पूरे प्रकरण को 'ड्रामा' बताते हुए कहा कि छात्र नेता सहानुभूति बटोरने के लिए ऐसा कर रहे हैं। वहीं, झामुमो और कांग्रेस ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लेना अस्वीकार्य है। एआईएसए ने आरोप लगाया कि हमलावर सत्ताधारी दल के छात्र संगठन से जुड़ा हुआ है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक मानवीय पहलू भी सामने आया जब सर्वोच्च न्यायालय के वकील मोहम्मद जुनैद मलिक रांची पहुंचे और आंदोलनकारी छात्रों को भोजन कराया। जुनैद इससे पहले दिल्ली में भी प्रदर्शनकारी छात्रों की मदद कर चुके हैं। उनकी इस पहल की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है। छात्रों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका और नागरिक समाज का समर्थन मिल रहा है, जिससे उनका हौसला बढ़ा है। फिलहाल रांची में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर भारी बल तैनात कर दिया है। राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जेपीएससी परीक्षा को रद्द कर पारदर्शी जांच कराए। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को पूरे राज्य में फैलाएंगे। आने वाले दिन इस बात के लिए निर्णायक होंगे कि झारखंड का यह छात्र आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।