थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के निकट एक स्कूल में मंगलवार को हुई दिल दहला देने वाली गोलीबारी में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और दस से अधिक घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, एक किशोर छात्र ने पहले अपने दादा-दादी की हत्या की, फिर स्कूल जाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। घटना के बाद हमलावर ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस भयावह वारदात ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है और स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर 14 वर्षीय छात्र था जो उसी स्कूल का विद्यार्थी बताया जा रहा है। सुबह उसने अपने घर पर दादा-दादी को गोली मारी, फिर स्कूल पहुंचकर कक्षाओं में घुसकर फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज सुनते ही छात्र-छात्राएं मेजों के नीचे छिप गए और शिक्षकों ने दरवाजे बंद कर बच्चों को बचाने का प्रयास किया। कई घंटे चले इस आतंक के मंजर में कई मासूमों की जान चली गई, जबकि घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने स्कूल को सील कर फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हमलावर के पास अवैध हथियार था और वह मानसिक तनाव से गुजर रहा था। अधिकारियों ने स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाने और छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य करने की बात कही है। इस घटना ने थाईलैंड ही नहीं, पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर स्कूली बच्चों के रोते-बिलखते वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां वे मेजों के नीचे दुबके हुए हैं और गोलियों की आवाज से कांप रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल सुरक्षा उपाय काफी नहीं, बल्कि युवाओं की मानसिक सेहत पर ध्यान देना और हथियारों तक आसान पहुंच रोकना भी जरूरी है। थाईलैंड में यह पहली बड़ी स्कूल शूटिंग की घटना है, जिसने शांतिप्रिय समाज को गहरा आघात पहुंचाया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और घायलों का मुफ्त इलाज कराने की घोषणा की है। साथ ही, देशभर के स्कूलों में आपातकालीन अभ्यास और सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। इस त्रासदी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए समाज, परिवार और सरकार को मिलकर काम करना होगा, ताकि कोई और मासूम ऐसी भयावहता का शिकार न बने।