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Breaking News: सरकार के ₹1 लाख करोड़ के डीप-टेक फंड पर विवाद: चयन पैनल से जुड़ी निजी फर्मों को राशि आवंटित, सरकार ने दी सफाई
🕒 1 month ago

देश में डीप-टेक नवाचार को गति देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनोवेशन (आरडीआई)' योजना विवादों में घिर गई है। केंद्र सरकार ने इस ₹1 लाख करोड़ के कोष से पहली किश्त के रूप में लगभग ₹2,000 करोड़ से ₹2,192 करोड़ तक की राशि मंजूर की है, जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी वाले स्टार्टअप और उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) के माध्यम से संचालित इस योजना को भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी मानचित्र पर अग्रणी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा था, लेकिन हालिया खुलासों ने इसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और जांच पड़ताल के अनुसार, इस कोष का लाभ पाने वाली कई निजी कंपनियों और संस्थानों के तार सीधे उस चयन पैनल से जुड़े पाए गए हैं, जिन्होंने इन अनुदानों को मंजूरी दी थी। आरोप है कि चयन समिति के कुछ सदस्यों के हित उन फर्मों से जुड़े हुए थे जिन्हें धन आवंटित किया गया है। इस 'हितों के टकराव' (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) के मामले ने पूरे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चयनकर्ता ही लाभार्थी बन जाएं, तो यह न केवल नैतिक मानकों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका को भी बल देता है। विवाद बढ़ता देख सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए इन रिपोर्ट्स को भ्रामक और तथ्यों से परे करार दिया है। सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, योग्यता आधारित और स्थापित दिशानिर्देशों के अनुरूप थी। अधिकारियों का दावा है कि पैनल के सदस्यों ने निर्धारित मानदंडों के तहत अपने हितों की घोषणा की थी और जहां भी टकराव की स्थिति थी, वहां संबंधित सदस्यों ने खुद को निर्णय प्रक्रिया से अलग कर लिया था। सरकार ने जोर देकर कहा कि डीप-टेक जैसे रणनीतिक क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी अनिवार्य है और कुछ तत्व योजना की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, सरकार की सफाई के बावजूद विपक्ष और नागरिक समाज के संगठन स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि केवल आंतरिक स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है और एक स्वतंत्र ऑडिट या न्यायिक जांच ही दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है। इस योजना की सफलता भारत के भविष्य की प्रौद्योगिकी क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए इसमें जनता का विश्वास बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। निष्कर्षतः, आरडीआई कोष पर छाया यह विवाद एक बड़े अवसर के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आया है। सरकार को चाहिए कि वह पारदर्शिता के उच्चतम मानक स्थापित करे, ताकि डीप-टेक क्रांति का यह रथ विवादों की धूल में न फंसे बल्कि नवाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करे। सार्वजनिक धन की पवित्रता और संस्थागत ईमानदारी ही इस योजना की असली पूंजी है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 07 Aug 2026