ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति ने एक महत्वपूर्ण मसौदा विधेयक की समीक्षा शुरू कर दी है जिसमें होरमुज़ जलडमरूमध्य से अमेरिकी और इज़राइली जहाजों के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार इस विधेयक का उद्देश्य क्षेत्र में विदेशी सैन्य उपस्थिति को सीमित करना और ईरान की समुद्री सीमाओं की रक्षा करना है। इस कदम से पहले से ही तनावग्रस्त खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक हालात और अधिक जटिल होने की आशंका है। होरमुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है जहां से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति होती है। प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका और इज़राइल के सैन्य व वाणिज्यिक जहाजों को इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मच सकती है और तेल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। इस बीच, संबंधित घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि ईरान के साथ जारी टकराव अधिक समय तक नहीं चल सकता। वहीं ईरान और ओमान के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने पर सहमति बनी है, जिससे तात्कालिक राहत मिली है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखी जा रही है क्योंकि बाजार को आशंका है कि ईरान का नया विधेयक इस अस्थायी समझौते को प्रभावित कर सकता है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी कूटनीति को 'थिएटर कूटनीति' बताकर मज़ाक उड़ाया है और स्पष्ट किया है कि वे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेंगे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र, स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। निष्कर्ष के तौर पर, होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का यह आक्रामक रुख क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद में इस विधेयक पर मतदान और अमेरिका व उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया निर्णायक साबित होगी। शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा एक छोटी सी चिंगारी बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती है।