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Breaking News: राज्यसभा में अमित शाह की मौजूदगी की मांग: सभापति ने केंद्र से किया अनुरोध पर विचार का आग्रह, 13वें दिन भी गतिरोध जारी
🕒 1 month ago

संसद के मानसून सत्र में गतिरोध तेरहवें दिन भी जारी रहा, क्योंकि विपक्ष कथित राम मंदिर घोटाले और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार विरोध कर रहा है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से विपक्ष की उस मांग पर विचार करने को कहा, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की बात कही गई है। सभापति ने कहा कि वे विपक्ष की भावनाओं से अवगत हैं और सरकार से इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह करते हैं। विपक्षी दलों के सदस्य पिछले कई दिनों से "अमित शाह जवाब दो" के नारे लगाते हुए सदन के वेल में धरना दे रहे हैं। उनका आरोप है कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े न्यास में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक कार्रवाई की। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और वाम दलों समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री या गृह मंत्री के बयान की मांग को लेकर दोनों सदनों की कार्यवाही ठप कर रखी है। मंगलवार को भी राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे, जिसके चलते सभापति को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। पहली बार सुबह 11 बजे और फिर दोपहर 12 बजे तक के लिए। लोकसभा में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां विपक्षी सदस्यों ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष शर्तें थोप रहा है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। इस गतिरोध के चलते कई महत्वपूर्ण विधेयक लटके पड़े हैं, जिनमें एफसीआरए संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक जैसे अहम बिल शामिल हैं। सरकार का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर सदन नहीं चलने दे रहा, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार ज्वलंत मुद्दों से भाग रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव लंबा खिंच सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं। सभापति की पहल को एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। अगर गृह मंत्री सदन में आकर बयान देते हैं तो गतिरोध टूट सकता है, अन्यथा मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा हंगामे की भेंट चढ़ सकता है। जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए बने संसद के पवित्र मंच का इस तरह ठप होना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 06 Aug 2026