जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार को हुए भीषण आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी में गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आतंकियों ने दो प्रवासी श्रमिकों को उनकी जाति और समुदाय पूछकर गोली मार दी, जिससे पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। मृतक दोनों युवक छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और बेहतर आमदनी की तलाश में कश्मीर आए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस घटना ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि प्रवासी श्रमिकों के मन में भी भय पैदा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आतंकियों ने हमले से पहले पीड़ितों से उनकी पहचान और जाति के बारे में पूछा था। पीड़ितों के परिजनों ने दावा किया है कि आतंकियों ने विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए उनकी पहचान सुनिश्चित की और फिर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इस निर्मम हत्याकांड के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर और उसके सहयोगी का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है और हमलावरों को पकड़ने के लिए व्यापक स्तर पर ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस दुखद घटना पर त्वरित संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मृतक श्रमिकों के परिजनों के लिए 20-20 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्र सरकार ने भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। मृतकों के शवों को सम्मानपूर्वक उनके गृह राज्य पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस हमले ने एक बार फिर रेखांकित किया है कि आतंकी संगठन घाटी में शांति और विकास की प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए निहत्थे और निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। प्रवासी श्रमिक जो रोजी-रोटी की तलाश में यहां आते हैं, वे आतंकियों के लिए आसान लक्ष्य बन गए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमलों को रोकने के लिए खुफिया तंत्र को और मजबूत करने के साथ-साथ प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाने की आवश्यकता है। अंत में, कुलगाम का यह हमला न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र की अंतरात्मा को झकझोरने वाली घटना है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में खड़ा करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यह अपेक्षा की जाती है कि घाटी में अमन-चैन की बहाली के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।