जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में दो प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार इस आतंकी वारदात के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष कमांडर और उसके सहयोगी का हाथ होने की पुष्टि हुई है। मारे गए दोनों मजदूर बिहार के रहने वाले थे और रोजगार की तलाश में कश्मीर आए थे। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस और सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने आतंकियों की तलाश में कुलगाम और आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष दस्ते शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक आतंकियों ने मजदूरों की पहचान उनकी जाति और समुदाय पूछकर की थी, जिसके बाद उन्हें गोली मार दी गई। इस बर्बर कृत्य की चौतरफा निंदा हो रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों को दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। मृतक मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बेहतर आमदनी की उम्मीद में घर से निकले थे, लेकिन आतंक की भेंट चढ़ गए। बिहार सरकार ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन से संपर्क साधा है और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला कश्मीर में गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की साजिश का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में प्रवासी मजदूरों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सुरक्षाबलों ने आतंकियों के संभावित ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी है। ड्रोन और खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल कर आतंकियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है। इस घटना ने एक बार फिर कश्मीर में आतंकवाद के खतरे को उजागर किया है और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है। इस दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षाबलों का मनोबल बनाए रखना और आतंकियों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करना समय की मांग है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य और केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।