भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पूनावाला ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के बायो से भाजपा का उल्लेख हटाते हुए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उनके इस अचानक फैसले ने पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को चौंका दिया है, क्योंकि वे लंबे समय से पार्टी के मुखर प्रवक्ता के रूप में जाने जाते रहे हैं। इस्तीफे के तुरंत बाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा व्यंग्यात्मक हमला बोला। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, "मोदी जी, राहुल गांधी से सीखिए कि असली तानाशाह कैसे बना जाता है। आप तो ठीक से तानाशाह भी नहीं बन पा रहे हैं।" उनका यह बयान विपक्षी दलों द्वारा प्रधानमंत्री पर लगाए जाने वाले 'तानाशाही' के आरोपों पर कटाक्ष माना जा रहा है। पूनावाला ने कहा कि वे प्रधानमंत्री के रवैये से निराश हैं और विपक्ष के 'तानाशाह' वाले नैरेटिव को प्रधानमंत्री अपने आचरण से सही साबित नहीं कर पा रहे हैं। पूनावाला के इस कदम के पीछे की वजहों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। कुछ सूत्रों का कहना है कि पार्टी में उनकी उपेक्षा और उचित पद न मिलने से वे नाराज चल रहे थे। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम किसी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो सकती है। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही अपनी भविष्य की योजनाओं का खुलासा कर सकते हैं। भाजपा नेतृत्व की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सोशल मीडिया पर पूनावाला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भाजपा समर्थक जहां इसे विश्वासघात बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों के नेता उनके साहस की सराहना कर रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को भाजपा के अंदरूनी असंतोष का प्रतीक बताया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी साल में एक प्रमुख अल्पसंख्यक चेहरे का इस तरह पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में वैचारिक मतभेदों और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के टकराव को सामने ला दिया है। शहजाद पूनावाला का भाजपा छोड़ना और प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलना, पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और असहमति की आवाजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में पूनावाला का अगला कदम और भाजपा की प्रतिक्रिया इस राजनीतिक ड्रामा की दिशा तय करेगी। फिलहाल, यह घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।