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Breaking News: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर सख्त सजा का कानून लागू, पेपर लीक रोकने को मिलेगी नई ताकत
🕒 1 hour ago

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके बाद देशभर में सरकारी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक तथा नकल जैसे गंभीर अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान प्रभावी हो गया है। इस नए कानून के तहत दोषियों को अधिकतम दस वर्ष तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, साथ ही संपत्ति जब्ती का अधिकार भी जांच एजेंसियों को दिया गया है। विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की पवित्रता बनाए रखना और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले गिरोहों पर नकेल कसना है। संशोधित कानून में जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के विशेष प्रावधान किए गए हैं। अब पेपर लीक के मामलों की जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा, और विशेष अदालतों के माध्यम से त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है, और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है। तकनीकी उपायों के साथ-साथ मानवीय निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है। इस विधेयक को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। पंजाब भाजपा ने इसका स्वागत करते हुए इसे युवाओं के हित में ऐतिहासिक कदम बताया है, जबकि आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने एनईईटी परीक्षा विवाद पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर भी निशाना साधा है। उन्होंने 2016 के कर्नाटक पेपर लीक मामले का हवाला देकर कहा कि समस्या की जड़ें गहरी हैं और केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि उसे ईमानदारी से लागू करने से हल निकलेगा। शिक्षाविदों और अभ्यर्थी संगठनों ने इस कदम को सराहा है, लेकिन साथ ही जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की मांग भी की है। उनका मानना है कि पेपर लीक का पूरा तंत्र संगठित अपराध की तरह काम करता है, जिसमें कोचिंग संस्थान, प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन और परीक्षा केंद्रों तक के लोग शामिल होते हैं। इसलिए केवल सजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं, बल्कि खुफिया तंत्र, डिजिटल निगरानी और व्हिसलब्लोअर सुरक्षा जैसे उपायों को भी कानून का हिस्सा बनाना होगा। निष्कर्षतः, राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ लागू हुआ यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। अब चुनौती इस कानून को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की है। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ऐसी संस्थागत व्यवस्था बनानी होगी जहां पेपर लीक की सोच भी अपराधियों के मन में भय पैदा करे। तभी लाखों युवाओं का सपना और मेहनत सुरक्षित रह सकेगी, और देश की परीक्षा प्रणाली विश्वसनीय बन सकेगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 Aug 2026