प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के भोगापुरम में बहुप्रतीक्षित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भव्य उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। लगभग पांच हजार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह हवाई अड्डा न केवल आधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रतीक है, बल्कि यह महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की वीरता और बलिदान को एक जीवंत श्रद्धांजलि भी है। इस नए प्रवेश द्वार के खुलने से उत्तर आंध्र क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखे जाने की उम्मीद जगी है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह हवाई अड्डा क्षेत्र की आकांक्षाओं को पंख देगा और आर्थिक प्रगति का नया अध्याय शुरू करेगा। उन्होंने इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना की। वहीं, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भावुक होते हुए घोषणा की कि इस हवाई अड्डे के चालू होने के बाद उत्तर आंध्र क्षेत्र से रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में होने वाला पलायन बीते दिनों की बात हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अपार अवसर सृजित करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की आधारशिला वर्ष 2019 में रखी गई थी और रिकॉर्ड समय में इसका निर्माण पूरा किया गया है। यहां विश्वस्तरीय यात्री टर्मिनल, कार्गो टर्मिनल और लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है जो बड़े विमानों के संचालन में सक्षम है। अधिकारियों के अनुसार आगामी 17 अगस्त से यहां से वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन विधिवत शुरू हो जाएगा। इससे विशाखापत्तनम और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक हवाई यात्रा के लिए दूर जाना पड़ता था। इस हवाई अड्डे का नामकरण अल्लूरी सीताराम राजू के नाम पर करना जनजातीय गौरव और स्वतंत्रता संग्राम के भूले-बिसरे नायकों को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अल्लूरी सीताराम राजू ने रम्पा विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अद्वितीय साहस का परिचय दिया था। निष्कर्षतः, भोगापुरम हवाई अड्डा केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर आंध्र के सामाजिक-आर्थिक कायाकल्प का वाहक साबित होगा। यह परियोजना 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को चरितार्थ करती हुई क्षेत्र को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने के लिए तैयार है।