भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित मुजाहिदीन अब अपने ही लोगों के खिलाफ बंदूकें तान रहे हैं, जो इस्लामाबाद की आतंकवाद प्रायोजित नीति का भयावह परिणाम है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस क्षेत्र में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लेने और पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों ने पीओके के विभिन्न हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया, जिसमें कई लोग हताहत हुए और सैकड़ों गिरफ्तार किए गए। प्रदर्शनकारी बुनियादी अधिकारों, रोजगार और क्षेत्र के संसाधनों पर स्थानीय हक की मांग कर रहे थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन प्रदर्शनकारियों को 'देशद्रोही' और 'दुश्मन एजेंट' करार देकर उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास किया। भारत ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का मजाक और पाकिस्तान के दोहरे चरित्र का प्रमाण बताया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान दशकों से कश्मीर के नाम पर आतंकी संगठनों को पालता-पोसता रहा है, लेकिन अब वही चरमपंथी गुट पाकिस्तानी राज्य के लिए ही चुनौती बन गए हैं। पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में लंबे समय से जारी शोषण, संसाधनों की लूट और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखने के कारण स्थानीय आबादी में असंतोष चरम पर है। पाकिस्तान की सैन्य अदालतों द्वारा नागरिकों पर मुकदमे चलाना और जबरन गायब करवाने की घटनाएं आम हो गई हैं, जिस पर वैश्विक मानवाधिकार संगठन पहले भी चिंता जता चुके हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और वहां की जनता की आकांक्षाओं को दबाना पाकिस्तान के अवैध कब्जे की नाकामी को दर्शाता है। नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का संकेत दिया है। साथ ही, पाकिस्तान को चेताया कि वह आतंकवाद का निर्यात बंद करे और अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों का सम्मान करे। अंततः, पीओके में जारी दमन चक्र पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता और उसकी कश्मीर नीति के खोखलेपन को उजागर करता है। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चुप्पी पाकिस्तान को और दुस्साहस दे सकती है। भारत का रुख स्पष्ट है: क्षेत्र में शांति और स्थिरता तभी संभव है जब पाकिस्तान अवैध कब्जा छोड़े और जनता की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का सम्मान करे।