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Breaking News: जंतर मंतर पर छात्रों के अपशब्दों पर पीएम मोदी का बड़ा दिल: कहा- 'माफ करना चाहता हूं, हमारे बच्चे हैं, गालियों से कुछ हल नहीं होता'
🕒 1 hour ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों द्वारा उनके प्रति अपशब्दों का प्रयोग किए जाने पर बेहद संवेदनशील और उदार प्रतिक्रिया दी है। देर रात सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि वे उन छात्रों को माफ करना चाहते हैं, क्योंकि वे 'हमारे बच्चे' हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है। पीएम मोदी का यह रुख उनकी उस छवि को और मजबूत करता है, जिसमें वे विरोध को भी लोकतंत्र का हिस्सा मानते हुए सहनशीलता का परिचय देते रहे हैं। अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'गालियों से कभी कुछ हल नहीं होता'। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि भटके हुए लोगों का मार्गदर्शन किया जाए और मिलकर भारत के निर्माण में योगदान दिया जाए। प्रधानमंत्री का यह कथन उस समय आया है जब जंतर मंतर पर चल रहे एक प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की थी। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जहां एक तरफ विपक्षी दलों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी बताया, वहीं सत्तापक्ष के कई नेताओं ने इसकी कड़ी निंदा की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवा शक्ति पर विश्वास जताते हुए कहा कि युवाओं में ऊर्जा और क्षमता दोनों है, बस जरूरत उसे सही दिशा देने की है। उन्होंने 'हमारे बच्चे हैं' कहकर एक अभिभावक जैसा भाव प्रदर्शित किया, जिसकी सराहना विभिन्न वर्गों में हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल उनकी उदारता दर्शाता है, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश भी है कि सरकार असहमति की आवाजों को दबाने के बजाय संवाद में विश्वास रखती है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। जहां भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री की बड़प्पन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता बताया, वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे चुनावी रणनीति करार दिया। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के एक बड़े वर्ग ने प्रधानमंत्री के इस रुख का स्वागत किया है और इसे लोकतंत्र में सहनशीलता का एक आदर्श उदाहरण माना है। अंततः प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि मतभेद कितने भी गहरे हों, संवाद और सहनशीलता ही उनका एकमात्र समाधान है। 'गालियां कभी किसी समस्या का हल नहीं करतीं' - यह पंक्ति न केवल प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक सीख है। अब देखना यह होगा कि इस उदार पहल का जमीनी स्तर पर क्या असर होता है और क्या यह राजनीतिक विमर्श में शिष्टता की एक नई परंपरा की शुरुआत करेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 31 Jul 2026