महाराष्ट्र के भिवंडी में शनिवार तड़के हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मुंबई से सटे भिवंडी के वालपाड़ा इलाके में एक चार मंजिला आवासीय इमारत अचानक भरभराकर गिर पड़ी, जिसमें दबकर अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरने से पहले तेज चटकने की आवाजें आईं, जिससे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना शनिवार सुबह करीब 3:45 बजे की बताई जा रही है, जब अधिकांश निवासी गहरी नींद में थे। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। अब तक मलबे से कई लोगों को जीवित निकाला गया है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इमारत के मलबे में अभी भी 6 से 7 लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचावकर्मी कटर, ड्रिल मशीन और खोजी कुत्तों की मदद से मलबे को हटाने में लगे हैं, लेकिन घनी आबादी और संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। इस हादसे में जीवित बचे लोगों ने जो आपबीती सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। मलबे से निकाले गए पीड़ितों ने बताया कि वे घंटों अंधेरे में, बिना भोजन और पानी के फंसे रहे। एक पीड़ित ने रोते हुए बताया कि उसने अपने परिवार के सदस्यों को अपनी आंखों के सामने दम तोड़ते देखा, लेकिन वह कुछ नहीं कर सका। कई परिवार ऐसे हैं जिनके एक से अधिक सदस्य अभी भी लापता हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी, इसकी शिकायत नगर निगम से कई बार की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। ठाणे नगर निगम ने क्षेत्र की अन्य जर्जर इमारतों का तत्काल सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और खतरनाक घोषित इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषी बिल्डर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा शहरीकरण की अंधी दौड़ और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी व्यवस्था का एक और दुखद उदाहरण है। मुंबई महानगर क्षेत्र में अवैध निर्माण और पुरानी इमारतों के रखरखाव की उपेक्षा लगातार जानलेवा साबित हो रही है। जरूरत इस बात की है कि केवल मुआवजे और जांच की औपचारिकता पूरी करने के बजाय, इमारतों की संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य की जाए और अवैध निर्माण पर सख्ती से रोक लगाई जाए। भिवंडी का यह हादसा प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है कि जानमाल की सुरक्षा से खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।