स्पेन के उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्यूटा एन्क्लेव में एक अभूतपूर्व मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है, जहां पिछले कुछ दिनों में मोरक्को की सीमा से लगभग 49 हजार प्रवासी स्पेनिश क्षेत्र में दाखिल हुए हैं। इस बड़े पैमाने पर पलायन के दौरान कम से कम 18 लोगों की जान चली गई है, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं। मोरक्को के सीमा सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर निगरानी ढीली किए जाने के बाद हजारों की संख्या में प्रवासी, जिनमें बड़ी तादाद में नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं, तैरकर या पैदल ही कंटीली तारों की बाड़ पार कर स्यूटा पहुंच गए। स्पेन ने इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर हमला बताते हुए सेना को तैनात कर दिया है और सीमा को सील करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इस संकट की पृष्ठभूमि में कूटनीतिक तनाव छिपा हुआ है। दरअसल, मोरक्को द्वारा पश्चिमी सहारा विवाद पर स्पेन के रुख से नाराजगी जताने के लिए सीमा नियंत्रण में ढील दिए जाने की बात सामने आ रही है। अप्रैल में स्पेन ने पश्चिमी सहारा के अलगाववादी नेता ब्राहिम गाली को मानवीय आधार पर अस्पताल में भर्ती कराया था, जिससे मोरक्को नाराज था। जानकारों का मानना है कि मोरक्को ने प्रवासियों को रोकने वाली अपनी सुरक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर कर स्पेन पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने स्थिति को गंभीर बताते हुए यूरोपीय संघ से मदद की गुहार लगाई है और इसे यूरोप की बाहरी सीमाओं की रक्षा का सवाल बताया है। मानवीय त्रासदी के इस मंजर में सबसे ज्यादा प्रभावित मासूम बच्चे और युवा हुए हैं। रेड क्रॉस और स्थानीय एनजीओ के स्वयंसेवक दिन-रात प्रवासियों को भोजन, कंबल और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने में जुटे हैं। स्यूटा के शरणार्थी केंद्र अपनी क्षमता से कई गुना अधिक भर चुके हैं। कई प्रवासी समुद्र में तैरकर आने के प्रयास में डूब गए या चट्टानों से टकराकर घायल हो गए। स्पेनिश पुलिस और सेना के जवान सीमा पर डटे हुए हैं और अवैध रूप से घुसे लोगों को वापस मोरक्को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन मानवाधिकार संगठनों ने सामूहिक निर्वासन पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की मांग की है। इस संकट का असर अब यूरोपीय राजनीति पर भी दिखने लगा है। इटली के आंतरिक मंत्री लुक्रेन्जो लामोर्गेसे ने मांग की है कि सीमा सुरक्षा में विफलता के लिए स्पेन को शेंजेन क्षेत्र से अस्थायी रूप से निलंबित किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि स्पेन यूरोप की दक्षिणी सीमा की रक्षा करने में नाकाम रहा है, जिससे पूरे शेंजेन क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पेन के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए मोरक्को से बातचीत का आह्वान किया है। जर्मनी और फ्रांस ने भी स्पेन का समर्थन किया है, लेकिन प्रवासन नीति पर यूरोपीय संघ के आंतरिक मतभेद एक बार फिर उभर कर सामने आ गए हैं। यह संकट यूरोप-अफ्रीका संबंधों की जटिलता और प्रवासन प्रबंधन की चुनौतियों को फिर से रेखांकित करता है। मोरक्को यूरोप के लिए प्रवासी द्वारपाल की भूमिका निभाता रहा है और इसके बदले उसे आर्थिक सहायता मिलती रही है। लेकिन कूटनीतिक विवादों में सीमा नियंत्रण को हथियार बनाने की नीति ने हजारों जिंदगियों को खतरे में डाल दिया है। तत्काल जरूरत मानवीय सहायता पहुंचाने और मृतकों की पहचान करने की है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए स्पेन, मोरक्को और यूरोपीय संघ को मिलकर एक स्थायी, मानवीय और कानूनी प्रवासन ढांचा तैयार करना होगा। इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीमाओं को बंद करने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि यह और गंभीर मानवीय संकट को जन्म देती है।