महाराष्ट्र के भिवंडी में शनिवार तड़के एक चार मंजिला आवासीय इमारत के अचानक ढह जाने से भयानक हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक नौ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पांच से अधिक लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं। घटना उस समय हुई जब इमारत में मरम्मत का कार्य चल रहा था। स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दमकल विभाग की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए खोजी कुत्तों और आधुनिक उपकरणों की मदद ली जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भिवंडी के कासारअली इलाके में स्थित यह इमारत लगभग तीस वर्ष पुरानी थी और इसकी हालत जर्जर हो चुकी थी। मरम्मत के दौरान अचानक इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा, जिससे पूरा ढांचा ही ढह गया। हादसे के वक्त इमारत में कई परिवार सो रहे थे, जिसके कारण जनहानि अधिक हुई। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। बचाव दल के अधिकारियों ने बताया कि मलबा अत्यधिक होने और संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। इसके बावजूद टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। स्थानीय निवासी भी बचाव कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने आसपास की जर्जर इमारतों को खाली कराकर एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। नगर निगम आयुक्त ने कहा कि इमारत के ढहने के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर मुंबई महानगर क्षेत्र में पुरानी और जर्जर इमारतों की समस्या को उजागर कर दिया है। मानसून से पहले ऐसे ढांचों का सर्वेक्षण और मरम्मत अनिवार्य है, लेकिन लापरवाही के कारण अक्सर ऐसे हादसे होते रहते हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी असुरक्षित इमारतों का तत्काल निरीक्षण कराकर उन्हें या तो मजबूत किया जाए या खाली करवाया जाए। फिलहाल राहत अभियान जारी है और प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को जिंदा निकालने पर केंद्रित है। इस दुखद घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि शहरी नियोजन और भवन सुरक्षा मानकों के सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।