उच्चतम न्यायालय ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन की चपेट में आए घायल प्रदर्शनकारियों के समुचित इलाज को सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिल्ली सरकार को दिया है। न्यायालय ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया, जिसमें पेलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए नागरिकों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार को तत्काल प्रभाव से सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करानी होंगी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पेलेट गन के उपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इसका प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। पीठ ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) से जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का पूरा ब्यौरा और लॉग तलब किया है। न्यायालय जानना चाहता है कि किस प्रोटोकॉल के तहत और किन परिस्थितियों में भीड़ नियंत्रण के लिए इस घातक हथियार का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। विशेषज्ञों और चिकित्सकों की राय का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता पक्ष ने न्यायालय को अवगत कराया कि पेलेट गन से होने वाली चोटें अत्यंत गंभीर और स्थायी प्रकृति की होती हैं। विशेषज्ञों ने चेताया है कि इसके छर्रे शरीर के संवेदनशील अंगों, विशेषकर आंखों में लगने पर स्थायी विकलांगता या अपूरणीय क्षति का कारण बन सकते हैं। इलाज के बावजूद कई पीड़ितों को जीवनभर शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने माना कि भीड़ नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों पर पुनर्विचार करने की सख्त आवश्यकता है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन के उपयोग संबंधी संपूर्ण प्रोटोकॉल की जांच करने का निर्णय लिया है। न्यायालय का मानना है कि नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कायम करने के लिए स्पष्ट और मानवीय दिशानिर्देश होने अनिवार्य हैं। इस कड़ी में न्यायालय ने संबंधित पक्षों से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया जा सके। इस आदेश को नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय की यह सक्रियता न केवल घायल प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत दिलाएगी, बल्कि सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग के मानकों को भी पुनर्परिभाषित करेगी। अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पेलेट गन के इस्तेमाल पर अंतिम नीति और घायलों के पुनर्वास की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।