संसद के मानसून सत्र के नौवें दिन राज्यसभा में असम में आई भीषण बाढ़ का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विभिन्न दलों के सांसदों ने बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों की पीड़ा को सामने रखते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत पैकेज और दीर्घकालिक प्रबंधन योजना की मांग की। सदन में विपक्षी सदस्यों ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर इस मसले पर विस्तृत चर्चा की मांग की, जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी रही। सभापति ने सदस्यों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मंत्री को विस्तृत बयान देने का निर्देश दिया। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन पर उठे सवालों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चारों श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर नियमों को अधिसूचित किया जा रहा है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योगों को भी सुगम बनाया जाएगा। इसी बीच सरकार ने राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 पेश किया, जिसे नकल विरोधी विधेयक के नाम से जाना जा रहा है। यह विधेयक प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए कड़े प्रावधान करता है, जिसमें दस वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद भवन परिसर में बैठक कर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्र आंदोलनों पर संयुक्त रणनीति तय की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई इस बैठक में तय हुआ कि दोनों सदनों में इन मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव लाए जाएंगे और प्रधानमंत्री से बयान की मांग की जाएगी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। सत्र के शेष दिनों में भी गतिरोध बने रहने के आसार हैं। सरकार जहां विधायी कार्य निपटाने पर जोर दे रही है, वहीं विपक्ष जवाबदेही तय करने पर अड़ा है। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र का नतीजा आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। अब सबकी नजरें अगले कुछ दिनों की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां बाढ़ राहत, श्रम सुधार और परीक्षा सुधार जैसे अहम विधेयकों का भविष्य तय होगा।