संसद का मानसून सत्र 2026 आज उस समय गहमागहमी का केंद्र बन गया जब सरकार ने लोकसभा में बहुप्रतीक्षित पेपर लीक रोधी विधेयक पेश किया। एक ओर जहां सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता के मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा खड़ा कर दिया। कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर गृह मंत्री अमित शाह से माफी की मांग की, जिससे सत्र की शुरुआत ही तूफानी रही। लोकसभा में पेपर लीक रोधी विधेयक पेश करते समय विपक्ष के भारी शोर-शराबे के बीच सरकार ने इसे पारित कराने की मंशा जाहिर की। इस विधेयक में पेपर लीक करने वालों के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करेगा। हालांकि, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है और फिर उन्हीं के हित की बात कर रही है। भाजपा ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और युवाओं के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा हालिया छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल और बर्बर लाठीचार्ज रहा। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए सवाल पूछा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपराधियों की तरह पीटा गया, जो असहनीय है। इस मुद्दे को संसद के भीतर ले जाते हुए कांग्रेस ने दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव और कार्य स्थगन के नोटिस पेश किए। पार्टी का कहना है कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर बयान नहीं देते और माफी नहीं मांगते, तब तक कार्यवाही चलने नहीं दी जाएगी। वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है और महत्वपूर्ण विधेयकों को लटकाना चाहता है। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से शांति बनाए रखने और विधेयक पर सार्थक चर्चा में भाग लेने की अपील की। पहले दिन के घटनाक्रम से साफ है कि इस मानसून सत्र में पेपर लीक कानून और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई दो बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं। जहां सरकार विधायी एजेंडा पूरा करने पर अडिग है, वहीं विपक्ष जवाबदेही तय कराने पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं। देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या संसद इन ज्वलंत मुद्दों पर कोई सर्वसम्मत रास्ता निकाल पाएगी या फिर गतिरोध जारी रहेगा।