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Breaking News: संसद में अमित शाह बने विपक्ष का अगला निशाना, प्रधान के इस्तीफे के बाद गरमाई सियासत
🕒 53 minutes ago

संसद के मानसून सत्र के छठे दिन विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह को अपना अगला बड़ा निशाना बनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव और कार्यवाही निलंबन के नोटिस दिए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे तौर पर अमित शाह पर आरोप लगाया है कि सीजेपी मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसे लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। विपक्ष की रणनीति स्पष्ट है - प्रधान के जाने के बाद अब गृह मंत्री को निशाने पर लिया जाए। संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने NEET प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक मामले और जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए कार्यवाही बाधित की। सरकार ने इस बीच पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन विधेयक पेश करने की घोषणा की है, लेकिन विपक्ष इसे महज ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहा है। राहुल गांधी ने संसद सत्र फिर से शुरू होते ही अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक न्याय पीठ (सीजेपी) के मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलवाई गई, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। कांग्रेस ने दोनों सदनों में इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव दिया है, जबकि अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। संसदीय कार्यवाही लगातार बाधित होने से विधायी कामकाज प्रभावित हो रहा है। सरकार जहां पेपर लीक संशोधन विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण बिल पारित कराना चाहती है, वहीं विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष का मनोबल बढ़ा है और वह अब गृह मंत्री को घेरकर सरकार पर दबाव बनाना चाहता है। आने वाले दिनों में संसद में टकराव और बढ़ने के आसार हैं। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि संसद का मौजूदा सत्र हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष जहां अमित शाह को निशाना बनाकर सरकार को बैकफुट पर धकेलना चाहता है, वहीं सरकार विधायी एजेंडा पूरा करने की कोशिश में है। जनहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर संसदीय लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है। देखना होगा कि इस गतिरोध का समाधान कैसे निकलता है और क्या संसद अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभा पाती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026