संसद के मानसून सत्र में विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अपना अगला बड़ा निशाना बना लिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब विपक्षी दलों की पूरी ताकत गृह मंत्री पर केंद्रित हो गई है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बर्बरता के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए अमित शाह से माफी की मांग की है। संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों के विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष के भारी हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी सांसदों ने 'कॉकरोच पार्टी' के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव और कार्य निलंबन नोटिस दिए। कांग्रेस ने दोनों सदनों में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए नोटिस सौंपे हैं। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए हैं। संसदीय कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए गृह मंत्री से सदन में आकर बयान देने और माफी मांगने की मांग की। कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने धरना देकर अपना विरोध जताया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन से जुड़ा है। विभिन्न विपक्षी पार्टियों ने संयुक्त रूप से इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील की है। हालांकि विपक्ष अपने रुख पर अड़ा हुआ है और गृह मंत्री के बयान तक सदन न चलने देने की चेतावनी दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि विपक्ष अब गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है, खासकर युवा मतदाताओं के बीच। आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।