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Breaking News: नीट रीटेस्ट में कम अंक आने से आहत 19 वर्षीय छात्र ने की आत्महत्या, छोड़ा मार्मिक पत्र
🕒 1 hour ago

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां नीट (NEET) की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय एक छात्र ने रीटेस्ट में कम अंक आने के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक छात्र ने परीक्षा में 166 अंक प्राप्त किए थे, जो उसकी अपेक्षाओं और कटऑफ से काफी कम थे। इस असफलता से निराश होकर उसने अपने घर पर ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतक छात्र के कमरे से एक बेहद मार्मिक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसे पढ़कर हर किसी की आंखें नम हो गईं। उसने अपने माता-पिता को संबोधित करते हुए लिखा था, "आपने मेरे लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया, लेकिन मैं असफल रहा।" एक अन्य पंक्ति में उसने लिखा, "मेरा सपना अधूरा रह गया।" यह पत्र इस बात का गवाह है कि परीक्षा के दबाव और असफलता के डर ने उसे किस कदर तोड़ दिया था। खबरों के अनुसार, वह नीट की परीक्षा में कुछ ही अंकों से चूक गया था, जिसने उसके मन में गहरी निराशा पैदा कर दी थी। इस दुखद घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर पड़ रहे मानसिक दबाव और अभिभावकों की अपेक्षाओं के बोझ को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक परीक्षा में कम अंक आना जीवन का अंत नहीं है, लेकिन युवा मन इसे अपनी असफलता मानकर ऐसा कदम उठा लेते हैं। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें, उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें यह अहसास दिलाएं कि उनकी कीमत किसी परीक्षा के अंकों से नहीं आंकी जाती। पुलिस जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं छात्र पर किसी बाहरी दबाव या अन्य कारणों ने तो ऐसा कदम उठाने को मजबूर नहीं किया। हालांकि प्रारंभिक जांच में परीक्षा में कम अंक आना ही मुख्य वजह प्रतीत हो रही है। इस घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है और स्थानीय निवासियों के साथ-साथ छात्र समुदाय भी स्तब्ध है। प्रशासन की ओर से भी छात्रों के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की मांग उठने लगी है। अंत में, यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि हमें अपनी शिक्षा प्रणाली और पारिवारिक ढांचे में ऐसे तंत्र विकसित करने होंगे, जहां असफलता को जीवन का हिस्सा माना जाए, न कि अंत। अभिभावकों को अपने बच्चों का संबल बनना होगा, न कि उनकी अपेक्षाओं का बोझ। इस होनहार छात्र की असामयिक मृत्यु हम सभी को झकझोर कर रख देती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हम अपने बच्चों को कैसा भविष्य दे रहे हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026