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Breaking News: जंतर मंतर पर धरने की कमान संभाले 12 स्वयंसेवकों की टीम, सुविधाओं के अभाव में भी डटे रहे प्रदर्शनकारी
🕒 3 hours ago

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन को सुचारु रूप से चलाने के लिए 12 सदस्यों की एक समर्पित टीम दिन-रात जुटी हुई है। 'डर से बड़ी ताकत' के जज्बे के साथ ये स्वयंसेवक भोजन, पानी, चिकित्सा और सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस कोर टीम में छात्र, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी शामिल हैं जो बिना किसी औपचारिक नेतृत्व के समन्वय से काम कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। द प्रिंट की खबर के मुताबिक, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने से महिला प्रदर्शनकारी गंभीर संकट में हैं। कई महिलाओं को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि पानी की आपूर्ति काट दिए जाने से पीने के पानी तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। टेलीग्राफ इंडिया ने बताया कि सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने भोजन और पानी के लिए एसओएस जारी किया है, क्योंकि प्रशासन द्वारा सुविधाएं रोके जाने से स्थिति विकट हो गई है। इन तमाम बाधाओं के बावजूद स्वयंसेवकों का हौसला नहीं टूटा है। द हिंदू ने प्रदर्शन स्थल की तस्वीरों के माध्यम से दिखाया कि कैसे ये स्वयंसेवक घायलों की मरहम-पट्टी करने से लेकर लंगर चलाने तक हर मोर्चे पर डटे हैं। 12 सदस्यीय टीम ने शिफ्टों में काम बांट रखा है - कोई भोजन व्यवस्था देख रहा है, कोई चिकित्सा कैंप संभाल रहा है, तो कोई मीडिया समन्वय और कानूनी सहायता का जिम्मा उठाए हुए है। रात को कड़ाके की ठंड में भी ये लोग अलाव जलाकर प्रदर्शनकारियों का मनोबल बनाए रखते हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के बीच यह स्वयंसेवी तंत्र एक मिसाल बनकर उभरा है। बिना किसी फंडिंग या सरकारी मदद के, जनसहयोग और आपसी एकजुटता के बलबूते ये लोग हजारों प्रदर्शनकारियों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। वकीलों का पैनल मुफ्त कानूनी सलाह दे रहा है, डॉक्टर निःशुल्क इलाज कर रहे हैं, और स्थानीय गुरुद्वारे व मंदिर लंगर भेज रहे हैं। यह जनभागीदारी का वह स्वरूप है जो व्यवस्था की विफलता को नागरिक समाज की ताकत से चुनौती दे रहा है। जंतर मंतर का यह संघर्ष महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि नागरिक समाज के स्वतःस्फूर्त संगठन की जीवंत मिसाल है। जहां एक ओर सुविधाएं छीनकर आवाज दबाने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर आम लोग मिलकर उन सुविधाओं का विकल्प खड़ा कर रहे हैं। यह लड़ाई अब मांगों तक सीमित नहीं रही - यह गरिमा, अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का आंदोलन बन चुका है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने जनता की बुनियादी जरूरतें नजरअंदाज की हैं, जनता ने ही मिलकर व्यवस्था खड़ी की है। जंतर मंतर के ये 12 स्वयंसेवक और उनके साथ खड़े हजारों लोग इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026