📰 Kotputli News
Breaking News: सीजेपी संसद मार्च में RAF का पैलेट गन प्रयोग: 7 राउंड फायर, 5 प्रदर्शनकारी घायल; बल प्रमुख ने माना 'अत्यधिक बल', पैलेट गन पर लगा प्रतिबंध
🕒 2 hours ago

नई दिल्ली: सीजेपी के संसद मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) द्वारा पैलेट गन के प्रयोग का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आधिकारिक जांच में पता चला है कि एक आरएएफ कर्मी ने 7 राउंड फायर किए, जिनमें से 5 पैलेट प्रदर्शनकारियों को जा लगे। इस घटना ने सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ नियंत्रण के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद मचे जनाक्रोश और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच बल के वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा। आरएएफ प्रमुख ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि मार्च के दौरान 'अत्यधिक बल' का प्रयोग किया गया। इस स्वीकारोक्ति के तुरंत बाद बल ने जंतर मंतर जैसे संवेदनशील इलाकों में पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के प्रयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के आलोक में लिया गया है, जिनमें पैलेट गन को अंतिम विकल्प के तौर पर ही इस्तेमाल करने की बात कही गई है। वहीं, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक ने पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा (पोस्ट-एनालिसिस) कराने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इस झड़प में 47 आरएएफ कर्मी भी घायल हुए हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। डीजी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा की जाएगी और जवानों को संयम बरतने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस बीच, पैलेट गन की वैधता और इसके इस्तेमाल को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मत है कि भीड़ नियंत्रण के लिए घातक हथियारों का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय मानकों और घरेलू कानूनों का उल्लंघन है। नीट (NEET) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई इस कार्रवाई ने छात्रों और युवाओं में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' करार देते हुए गृह मंत्री से स्पष्टीकरण और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। निष्कर्षतः, इस घटना ने सुरक्षा बलों की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है। पैलेट गन पर प्रतिबंध एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई में निहित है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, और उसकी रक्षा करना राज्य का परम कर्तव्य। उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और भविष्य के लिए एक मिसाल कायम करेगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026