पुने में चल रहे केटन अग्रवाल हत्या मामले में नई तहों का पर्दा उठता दिख रहा है। पुलिस ने हाल ही में अपनी जांच में यह उजागर किया कि मुख्य अभियुक्त सिया गोयल और उसके साथी चेतन ने कई टेक्स्ट संदेशों में कोड‑शब्द, उपनाम और इमोजी का इस्तेमाल करके हत्याकांड की योजना बनाई थी। यह खुलासा न केवल केस की जटिलता को दर्शाता है, बल्कि इस बात का भी संकेत है कि अपराधियों ने डिजिटल संचार को छिपाने के लिए विशेष तकनीकी उपाय अपनाए थे। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने आगे की तफ़्तीश शुरू कर दी है और कई नए साक्ष्य एकत्रित किए हैं। जांच के दौरान प्राप्त हुए चैट लॉग में स्पष्ट रूप से देखा गया कि सिया और चेतन ने "सूरज", "नीली किताब" जैसे शब्दों को वास्तविक स्थितियों के संकेत के रूप में प्रयोग किया। इमोजी के जरिए उन्होंने स्थान परिवर्तन और कालक्रम को समझाने की कोशिश की, जैसे 🌲 (जंगल) और 🏰 (किला) को लोहगड़ फ़ोर्ट की ओर इशारा करने के लिए इस्तेमाल किया गया। इन कोड‑शब्दों को डिकोड करने पर पता चला कि हत्या का सटीक समय, स्थल और सहयोगी लोग पहले से तय थे। पुलिस ने इन संदेशों को डिकोड करने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली और इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ मिल सकीं। केस में सिया गोयल ने पहले ही पुलिस के समक्ष पॉलीग्राफ जांच की स्वीकृति दे दी थी, जिससे उसके बयान की सत्यता की जांच की जा सके। विधिक प्रक्रिया के तहत, पुणे में स्थित न्यायालय ने पुलिस की हिरासत में रहने की याचिका को अस्वीकार कर अभियुक्तों को ज्यूडिशियल रिमांड में भेज दिया। इस निर्णय के बाद सिया, चेतन और केटन के फ़ी़एन्स के रूप में उल्लेखित अन्य दो सहयोगियों को 16 जुलाई तक जजेसियल टॉर्नमेंट में रखा गया है। इस दौरान अदालत द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी निगरानी को भी आदेशित किया गया है, जिससे कोई भी नया साक्ष्य छुपा नहीं रह सके। निष्कर्ष स्वरूप, केटन अग्रवाल की हत्या के पीछे छिपे रहस्यमयी कोड‑शब्दों के खुलासे ने इस केस को नई दिशा दी है। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य को बारीकी से जांचकर अपराधियों की योजना को बिखेरा है और न्याय प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अब अदालत के निर्णयों और आगे की जांच के परिणामों की प्रतीक्षा करनी होगी, ताकि न्याय को पूर्ण रूप से स्थापित किया जा सके और इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए एक अधिक सख्त डिजिटल निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा सके।