पुने की अदालत ने दो प्रमुख आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक ज्यूडिशियल कस्टडी में रखरखाव करने का आदेश दिया, जबकि जांचकर्ताओं ने अभूतपूर्व तथ्य सामने लाए हैं। केतन अग्रवाल की हत्या के इस रहस्यमय मामले में, पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी ने अपने आपराधिक इरादों को छुपाने के लिए चैट में कोड शब्दों का प्रयोग किया था। यह खुलासा इस बात की ओर इशारा करता है कि हत्या की साजिश केवल एक जनाबे की दुश्मनी नहीं बल्कि एक व्यवस्थित योजना थी, जिसमें प्यार, हथियार और लोहे के बंधनों का मिश्रण देखा गया। पुने पुलिस के प्रमुख केस अधिकारी ने बताया कि सिया और चेतन ने अपने टेक्स्ट संदेशों में निरपराध दिखते शब्दों की पंक्तियों को कोड के रूप में इस्तेमाल किया। उदाहरण के तौर पर "ऑटो" शब्द का प्रयोग हथियारों को दर्शाने के लिये, "कलाकार" का प्रयोग हत्या करने वाले के लिए और "लोहा" का उपयोग बलिदान स्थल को छिपाने हेतु किया गया। इन कोडियों को पकड़ कर ही पुलिस ने उनके संदेह को आधा-रात में उजागर किया। जांच के दौरान, सिया को उसके पूर्वसंगठन के एक स्थान पर ले जाया गया, जहाँ उसने उन कोड शब्दों के पीछे की सच्ची मनशा को अपने सहयोगियों से साझा किया। इस प्रक्रिया में उनके मोबाइल फ़ोन से थ्रेड्स, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा को भी आधिकारिक तौर पर प्राप्त किया गया। अदालत ने इस समय सिया को अपनी मनोदशा के अनुरूप एक पॉलीग्राफ टेस्ट करने के लिए अनुमति दी है, जिससे यह निश्चित किया जा सके कि वे अपनी योजना में कितनी गहराई तक सम्मिलित रही हैं। इस बीच, चेतन को भी आगे की जांच में सहयोग करने के लिये पुलिस ने ज्यूडिशियल कस्टडी में रखा है। दोनों को जमानत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, क्योंकि उनके पास अब तक की जानकारियों से यह स्पष्ट हो चुका है कि उन्होंने केतन की हत्या को साकार करने के लिये एक रहस्यमयी नेटवर्क तैयार किया था। केतन अग्रवाल, जो एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट डीलर थे, के मरे होने के बाद उनके परिवार में अभिभूत शोक और उथल-पुथल छा गई है। परिवार के सदस्य अब न्याय के लिए दृढ़ संकल्प के साथ खड़े हैं और पुलिस से अपील कर रहे हैं कि सभी संदेहास्पद तत्वों को पूरी तरह से उजागर कर दिया जाए। इस मामले में सामाजिक मिडिया पर भी पकड़ बनी हुई है, जहाँ कई नागरिक और विश्लेषक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे निजी वार्तालापों के कोड शब्दों ने एक बड़े अपराध को संभव बनाया। सिया गोयल ने खुद को इस मामले में निर्ध्रृष्ट घोषित किया है और कहा है कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं को सम्मानपूर्वक अपनाएगी। इस बीच, पुलिस ने कहा है कि सभी जानकारी को साक्ष्य के तौर पर अदालत में पेश किया जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत उचित दंड सुनिश्चित किया जाएगा। इस केस की जटिलता और नई जानकारी ने पूरे पुणे तथा देश भर में एक गंभीर सवाल खड़ा किया है—डिजिटल संचार के माध्यम से अपराधियों को कैसे रोका जा सकता है, और क्या क़ानून व्यवस्था में इस दिशा में उचित बदलाव की जरूरत है।