तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य की टीवीके सरकार विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन की उपस्थिति नहीं चाहती। यह आरोप उस समय सामने आया जब राजनीतिक गलियारों में उदयनिधि के हालिया बयानों को लेकर विवाद गहराया हुआ है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर उनके पुत्र और युवा नेता उदयनिधि को सदन की कार्यवाही से दूर रखने का प्रयास कर रहा है, ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नया भूचाल आ गया है और पक्ष-विपक्ष में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। विवाद की जड़ में उदयनिधि स्टालिन का एक हालिया बयान है जिसमें उन्होंने अभिनेत्री त्रिशा को लेकर टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी पर भाजपा नेता खुशबू सुंदर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे महिला विरोधी करार दिया और उदयनिधि को खुली चुनौती दी। खुशबू सुंदर ने कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे अपने शब्दों पर कायम रहें। इस विवाद ने तूल पकड़ा और देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक रंग ले लिया। भाजपा ने इसे द्रविड़ पार्टियों की महिलाओं के प्रति सोच का परिचायक बताया, वहीं डीएमके ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। बढ़ते दबाव के बीच उदयनिधि स्टालिन ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी महिला का अपमान करना कतई नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामला शांत होता नहीं दिख रहा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उदयनिधि की संभावित गिरफ्तारी की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। टीवीके सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है। तमिलनाडु की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां सत्ताधारी दल विपक्ष को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा, वहीं डीएमके इस पूरे प्रकरण को सहानुभूति बटोरने के अवसर के रूप में देख रही है। आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान उदयनिधि की उपस्थिति या अनुपस्थिति इस राजनीतिक लड़ाई का अगला अध्याय लिखेगी। फिलहाल, जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह टकराव किस दिशा में जाता है और क्या इससे राज्य की राजनीतिक जमीन पर कोई स्थायी परिवर्तन आता है।