कतर के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता की कोई योजना नहीं है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि दोहा विभिन्न चैनलों के माध्यम से दोनों पक्षों के संपर्क में बना हुआ है और राजनयिक समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं पर नजर रखे हुए है। इस बीच, होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर सकारात्मक संकेतों से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक वरिष्ठ सहयोगी ने दावा किया कि ईरान के साथ होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने का समझौता "आज या कल" तक हो सकता है। वहीं, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि मंगलवार या बुधवार तक इस जलडमरूमध्य में "आवाजाही की स्वतंत्रता" सुनिश्चित करने वाला समझौता होने की संभावना है। इन बयानों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। होरमुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने भी अगस्त 5 तक ईरान के साथ होरमुज समझौते की संभावना जताई है, जिससे कूटनीतिक हलकों में सकारात्मक माहौल बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कतर की मध्यस्थता इस गतिरोध को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि दोहा के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। हालांकि, ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि प्रतिबंधों में ढील और उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटने के बाद ही वह किसी वार्ता के लिए तैयार होगा। अंत में, भले ही प्रत्यक्ष वार्ता की तत्काल संभावना न हो, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक गतिविधियों और होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी सहमति के संकेतों ने क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद जगाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और बयानों पर टिकी होगी, जो यह तय करेंगे कि क्या यह तनाव वास्तव में कम होता है या फिर यह केवल एक अस्थायी राहत साबित होती है।