लाल सागर में शनिवार को एक भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज पर संदिग्ध हूती विद्रोहियों द्वारा मिसाइल हमला किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि एमवी 'केम प्लूटो' नामक इस टैंकर पर उस समय हमला किया गया जब वह सऊदी अरब के जेद्दाह बंदरगाह से भारत के मंगलुरु की ओर जा रहा था। जहाज पर चालक दल के 22 सदस्य सवार थे, जिनमें 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। राहत की बात यह है कि हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है और सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। भारतीय नौसेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने युद्धपोत आईएनएस कोच्चि को घटनास्थल की ओर रवाना कर दिया है, जबकि एक समुद्री गश्ती विमान पी-8आई को भी निगरानी के लिए तैनात किया गया है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि जहाज के इंजन कक्ष में मामूली क्षति हुई है, लेकिन वह अभी भी तैरने में सक्षम है और सुरक्षित बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना को 'अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन' बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब लाल सागर क्षेत्र में हूती विद्रोहियों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले दो महीनों में इस क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का मार्ग परिवर्तित कर केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से भेजना शुरू कर दिया है, जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं। भारतीय व्यापार पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है, क्योंकि भारत का बड़ा हिस्सा यूरोप और अमेरिका के साथ व्यापार इसी मार्ग से करता है। भारत सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आवाज उठाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में उच्च स्तरीय बैठक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और विदेश सचिव विनय क्वात्रा के साथ स्थिति की समीक्षा की। सरकार ने भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की तैनाती बढ़ाने और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए मित्र देशों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, भारतीय जहाजों को इस क्षेत्र से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतने की एडवाइजरी भी जारी की गई है। इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने समुद्री सुरक्षा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर में जारी अस्थिरता का दीर्घकालिक समाधान केवल राजनयिक प्रयासों और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है। भारत, जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री शक्ति है, अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय नौसेना की बढ़ी हुई उपस्थिति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस संवेदनशील जलमार्ग में शांति और स्थिरता बहाल करने में निर्णायक साबित होंगे।