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Breaking News: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कारों का बीमा 4 साल और दोपहिया वाहनों का 6 साल अनिवार्य, 'नो इंश्योरेंस नो फ्यूल' नीति लागू होगी
🕒 48 minutes ago

उच्चतम न्यायालय ने सड़क सुरक्षा और वाहन बीमा के दायरे को बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को बढ़ाते हुए कारों के लिए चार वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार को 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' यानी बिना बीमा वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने की नीति पर पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का आदेश दिया है। यह फैसला देशभर में 16.54 करोड़ बिना बीमा वाले वाहनों की चिंताजनक संख्या को देखते हुए लिया गया है। न्यायमूर्ति की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए बीमा कवरेज का विस्तार बेहद आवश्यक है। वर्तमान में अधिकांश वाहन मालिक केवल एक वर्ष का बीमा कराकर नवीनीकरण नहीं कराते, जिससे दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित परिवार को आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। नए निर्देश के अनुसार अब नए वाहन खरीदते समय ही लंबी अवधि का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य होगा, जिससे बीमा कवरेज में निरंतरता बनी रहेगी। 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' नीति के तहत पेट्रोल पंपों पर वाहन का बीमा वैधता जांचने की व्यवस्था की जाएगी। जिन वाहनों का बीमा समाप्त हो चुका होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट को पहले कुछ राज्यों में लागू किया जाएगा और सफल रहने पर पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्रालय और बीमा नियामक संस्था को इस दिशा में त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बीमा कंपनियों के प्रीमियम संग्रह में वृद्धि होगी और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल सकेगा। हालांकि वाहन मालिकों पर प्रारंभिक वित्तीय बोझ बढ़ेगा, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह सड़क सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष की अवधि इसलिए रखी गई है क्योंकि इनकी दुर्घटना दर अधिक होती है और अक्सर इनके मालिक बीमा नवीनीकरण में लापरवाही बरतते हैं। इस निर्णय का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि इसके लिए पेट्रोल पंपों पर तकनीकी ढांचा विकसित करना होगा और बीमा डेटाबेस को वास्तविक समय में जोड़ना होगा। केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर पायलट प्रोजेक्ट की रूपरेखा प्रस्तुत करनी है। यह फैसला भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाने और दुर्घटना पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बशर्ते इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

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✍️ By Pradeep Yadav | 04 Aug 2026