अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने ईरान पर नियोजित सैन्य हमलों को रद्द कर दिया है, बशर्ते तेहरान के साथ 'तेजी से' एक समझौता हो जाए। इस फैसले से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, जहां हाल के हफ्तों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ गई थी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है और इजरायल भी इस पर राजी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का प्रस्ताव रखा था, जिसके बाद ट्रंप ने हमले टालने का फैसला लिया। बीबीसी और इंडिया टुडे सहित कई मीडिया संस्थानों ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताई है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अधिक पहुंच देने पर सहमति व्यक्त की है। बदले में अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है। ट्रंप ने कहा, 'हम एक ऐसे समझौते के करीब हैं जो सभी पक्षों के लिए फायदेमंद होगा। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू भी इस दिशा में प्रगति से संतुष्ट हैं।' हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सैन्य विकल्प पूरी तरह से खत्म नहीं हुए हैं और ईरान की ओर से किसी भी उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ईरान की घरेलू राजनीति, इजरायल की सुरक्षा चिंताएं और खाड़ी देशों के हित समझौते के क्रियान्वयन को जटिल बना सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने वार्ता जारी रखने का आग्रह किया है। अंत में, ट्रंप का यह फैसला कूटनीति को सैन्य टकराव पर प्राथमिकता देने का एक दुर्लभ उदाहरण है। यदि समझौता सफल होता है, तो यह परमाणु प्रसार रोकने और मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में वार्ता की प्रगति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।