जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार को आतंकवादियों ने दो प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया, जिसमें एक की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी के रूप में हुई है। यह हमला पिछले 21 महीनों में कश्मीर घाटी में प्रवासी श्रमिकों पर पहला बड़ा आतंकी हमला है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। घटना कुलगाम के मीरबाजार इलाके में उस समय हुई जब दोनों मजदूर अपने काम पर जा रहे थे। आतंकवादियों ने अचानक उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के निवासी के रूप में हुई है, जबकि घायल भी इसी राज्य का बताया जा रहा है। दोनों मजदूर यहां निर्माण कार्य में लगे हुए थे। हमले के तुरंत बाद आतंकवादी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। इस हमले ने एक बार फिर कश्मीर में गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में आतंकवादियों ने कुलगाम में ही दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी थी। उसके बाद से प्रवासी श्रमिकों पर कोई बड़ा हमला नहीं हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह हमला घाटी में सामान्य होती स्थिति को बाधित करने और प्रवासी श्रमिकों में भय पैदा करने के उद्देश्य से किया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों को जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया है। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है। ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से आतंकवादियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन ने घायल मजदूर के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं और मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है। स्थानीय राजनीतिक दलों ने भी इस कायराना हमले की कड़ी निंदा की है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कश्मीर में पर्यटन सीजन अपने चरम पर है और अमरनाथ यात्रा भी सुचारू रूप से चल रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवादी संगठन घाटी में शांति और विकास की प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं। सरकार को प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने होंगे, ताकि वे भयमुक्त होकर अपना काम कर सकें और घाटी की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें।