आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने लंबी चुप्पी के बाद पेपर लीक विवाद पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संसद में पेश किए गए एंटी-पेपर लीक बिल का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'परिवार के मुखिया' की तरह इस गंभीर समस्या का समाधान निकाल रहे हैं। चड्ढा ने इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया और सभी दलों से इसे पारित कराने की अपील की। अपने विस्तृत बयान में राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं ने देश के करोड़ों युवाओं के सपनों को चकनाचूर किया है। नया विधेयक दोषियों को कड़ी सजा देने के साथ-साथ परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वे एक जिम्मेदार अभिभावक की तरह युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए कड़े कानून ला रहे हैं। इस बिल में पेपर लीक करने वालों को दस साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। कर्नाटक में हुए परीक्षा पेपर लीक मामलों पर हमला बोलते हुए चड्ढा ने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, 'लीक डबल, ट्रॉमा ट्रिपल' - यानी कर्नाटक में पेपर लीक की घटनाएं दोगुनी हुई हैं और छात्रों का मानसिक आघात तीन गुना बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में परीक्षा माफिया बेखौफ घूम रहे हैं और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। चड्ढा ने मांग की कि कर्नाटक सरकार तुरंत दोषियों पर कार्रवाई करे और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाए। NEET परीक्षा विवाद पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी अब बदल गई है। पहले वे विपक्ष में रहकर सवाल उठाते थे, अब वे समाधान का हिस्सा बनना चाहते हैं। उन्होंने नए एंटी-चीटिंग बिल, पैलेट गन के इस्तेमाल और विरोध प्रदर्शनों पर दर्ज FIRs पर सरकार के रुख का समर्थन किया। चड्ढा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कड़े कदम जरूरी हैं, भले ही वे अलोकप्रिय लगें। अंत में राघव चड्ढा ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एंटी-पेपर लीक बिल को सर्वसम्मति से पारित करें। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। संसद का यह सत्र युवाओं के विश्वास को बहाल करने का ऐतिहासिक अवसर है, जिसे किसी भी कीमत पर गंवाया नहीं जाना चाहिए।