📰 Kotputli News
Breaking News: सीजेपी के सौरव दास ने राहुल गांधी के 'फायरिंग ऑर्डर' के दावों का समर्थन किया, अमित शाह की जवाबदेही की मांग
🕒 1 hour ago

सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के सौरव दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए गंभीर आरोपों का खुलकर समर्थन किया है। राहुल गांधी ने दावा किया था कि पिछले महीने की बीस तारीख को युवा प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के पीछे एक 'फायरिंग ऑर्डर' था, जिसकी जिम्मेदारी सीधे गृह मंत्री पर आती है। सौरव दास ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी से भागने नहीं दिया जा सकता और अमित शाह को इस पूरे प्रकरण के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। यह मामला अब संसद के गलियारों से लेकर सड़क तक तूल पकड़ चुका है। राहुल गांधी ने संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि वे अमित शाह को उनके पद से बर्खास्त करें। कांग्रेस का आरोप है कि युवा प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों, पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और गोलीबारी के आदेश दिए गए। इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने इसे अपनी रणनीति का केंद्रीय हिस्सा बना लिया है। सौरव दास ने इन आरोपों को बल देते हुए कहा कि जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं और उस पर राजनीतिक संरक्षण हो, तो न्याय की उम्मीद टूट जाती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें झूठ और भ्रामक सूचना फैलाने का प्रयास करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी पर संसद की गरिमा गिराने और पुलिस बल का मनोबल तोड़ने का आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की गई है। सत्तापक्ष का कहना है कि पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मानक प्रक्रिया का पालन किया था और इसे राजनीतिक रंग देना विपक्ष की हताशा दर्शाता है। इस आरोप-प्रत्यारोप के चलते संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है और कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। इस राजनीतिक टकराव के बीच नागरिक समाज और मानवाधिकार संगठनों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सौरव दास जैसे कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह केवल दो दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा का सवाल है। उन्होंने चेताया कि अगर सत्ता में बैठे लोग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए संस्थानों का दुरुपयोग करेंगे, तो लोकतंत्र कमजोर होगा। इस पूरे घटनाक्रम ने नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और परीक्षा सुधार विधेयक जैसे अन्य ज्वलंत मुद्दों के साथ मिलकर सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ विपक्ष और नागरिक अधिकार समूह जवाबदेही और न्याय की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ सरकार अपने रुख पर कायम है। संसद का वर्तमान सत्र इस टकराव का गवाह बन रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले की कोई स्वतंत्र जांच होगी या फिर यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा। जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 30 Jul 2026