गोवा में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। गोवा पुलिस ने प्रदर्शन के आयोजकों को 240 सवालों का एक विस्तृत प्रश्नपत्र थमाया है, जिसका मुख्य फोकस प्रदर्शन के दौरान लहराए गए 'फ्री उमर खालिद' के बैनर और नारों पर है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और अभिव्यक्ति की आजादी बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बहस तेज कर दी है। पुलिस की इस कार्रवाई को जहां विपक्ष दमनकारी बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इसे राष्ट्रविरोधी तत्वों को उजागर करने की कवायद बता रहा है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि NEET जैसे संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों के प्रदर्शन को 'सबसे निचले बौद्धिक स्तर' तक गिरा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गड़बड़ियों के विरोध में उमर खालिद जैसे विवादास्पद व्यक्ति के समर्थन में नारे लगाने का क्या औचित्य है। सीएम सावंत ने छात्रों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कुछ बाहरी तत्व छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। पुलिस महानिदेशक ने भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल नारे तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदर्शन के वित्तपोषण, आयोजकों के इरादों और बाहरी संबंधों तक फैला हुआ है। पुलिस द्वारा तैयार किए गए इस 240 सूत्रीय प्रश्नावली में आयोजकों की व्यक्तिगत जानकारी, उनके बैंक खातों का विवरण, प्रदर्शन के लिए धन कहां से आया, किसने बैनर छपवाए, उमर खालिद का पोस्टर लगाने का विचार किसका था, जैसे बेहद बारीकी से सवाल पूछे गए हैं। आयोजकों से यह भी पूछा गया है कि क्या उनका किसी राजनीतिक दल या गैर-सरकारी संगठन से संबंध है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने कुछ आयोजकों के मोबाइल फोन और लैपटॉप भी जब्त कर लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। इस कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताते हुए इसे असहमति की आवाज को कुचलने का प्रयास बताया है। दूसरी ओर, छात्र संगठनों का कहना है कि उनका विरोध विशुद्ध रूप से NEET परीक्षा में हुई धांधली और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के खिलाफ था। उन्होंने दावा किया कि उमर खालिद का बैनर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा भीड़ में घुसकर लगाया गया था, जिसका आयोजकों से कोई लेना-देना नहीं था। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह मूल मुद्दे NEET घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रवाद का कार्ड खेल रही है। कांग्रेस और AAP ने मांग की है कि सरकार छात्रों की जायज मांगों पर ध्यान दे न कि उन्हें प्रताड़ित करे। इस पूरे प्रकरण ने गोवा के शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। जहां एक तरफ पुलिस अपनी जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं नागरिक समाज इस बात पर चिंतित है कि कहीं छात्र आंदोलन को आपराधिक जांच का विषय बनाकर भविष्य में युवाओं को लोकतांत्रिक विरोध से न रोक दिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का नतीजा गोवा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में छात्र राजनीति और पुलिस अधिकारों की सीमा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। फिलहाल सभी की निगाहें जांच के नतीजों और अदालत के संभावित हस्तक्षेप पर टिकी हैं।