असम में बाढ़ की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार बाढ़ से मरने वालों की संख्या 78 तक पहुंच गई है, जबकि तीन लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। भारतीय मौसम विभाग ने अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है। राज्य के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और निचले इलाके जलमग्न हैं। हालांकि कुछ इलाकों में पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि घरों को भारी नुकसान पहुंचा है और उनमें कीचड़ भरा हुआ है, जिसके कारण लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट पा रहे हैं। राहत शिविरों में रह रहे हजारों परिवारों को भोजन, पेयजल और दवाइयों की सख्त जरूरत है। प्रशासन युद्धस्तर पर राहत कार्य चला रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी चुनौती बनी हुई है। शिवसागर जिले के बाढ़ पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे उन्होंने रातों-रात जान बचाकर ऊंचे स्थानों पर शरण ली। एक पीड़ित ने कहा, "पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि हमें कुछ समझ नहीं आया। हमने सिर्फ अपने बच्चों को लेकर किसी तरह जान बचाई।" अब जब पानी घट रहा है, तब भी उनके सामने घरों की मरम्मत, फसलों की बर्बादी और आजीविका का संकट खड़ा है। लंबी 회복 की प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी हैं। हेलीकॉप्टरों से खाद्य सामग्री गिराई जा रही है और चिकित्सा दल बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान चला रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी अतिरिक्त सहायता राशि जारी की है, लेकिन जमीनी स्तर पर वितरण में देरी की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय गैर-सरकारी संगठन भी राहत सामग्री बांटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण असम में बाढ़ की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ रही है। केवल तात्कालिक राहत से काम नहीं चलेगा, बल्कि दीर्घकालिक योजना, नदी तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और वन क्षेत्रों के संरक्षण पर जोर देना होगा। तब ही इस वार्षिक त्रासदी से स्थायी निजात मिल सकेगी। फिलहाल पूरा ध्यान पीड़ितों को सुरक्षित निकालने और उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने पर केंद्रित है।